वेनेजुएला में अमेरीकी एक्शन की चीनी सोशल मीडिया पर तारीफ:लोग बोले- US मादुरो को पकड़ सकता है तो ताइवान पर चीन कब्जा क्यों नहीं कर सकता

अमेरिकी सेना की डेल्टा फोर्स के एलीट कमांडो वेनेजुएला में राष्ट्रपति को अगवा करने की आखिरी तैयारी कर रहे थे। ठीक उसी वक्त राष्ट्रपति निकोलस मादुरो चीन के लैटिन अमेरिका मामलों के अधिकारी किउ शियाओची के साथ फोटो खिंचवा रहे थे। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक निकोलस मादुरो ने चीनी अधिकारी से कहा कि शी जिनपिंग उनके लिए एक बड़े भाई की तरह हैं। इस घटना के कुछ ही घंटे बाद अमेरिकी सेना मादुरो को उनके बेडरूम से खींचकर अपने देश लेकर चले गए। इस घटना के बाद चीन भले ही चिंतित और नाराज है लेकिन वहां की सोशल मीडिया पर ऑपरेशन वेनेजुएला की तारीफ हो रही है। कई यूजर्स इसे ताइवान पर चीनी सैन्य कब्जे के लिए एक मॉडल के रूप में देख रहे हैं। मादुरो की गिरफ्तारी से चीन नाराज चीन ने मादुरो की गिरफ्तारी की तुरंत निंदा की और वॉशिंगटन पर ‘दुनिया का पुलिसवाला’ बनने का आरोप लगाया। चीन ने अमेरिकी छापे को गलत बताया और मादुरो व उनकी पत्नी की तुरंत रिहाई की मांग की। सोमवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आयरलैंड के प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान अमेरिका पर इशारों-इशारों में हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका का एकतरफा दबाव और धमकी देने वाला रवैया पूरी दुनिया की व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। शी जिनपिंग ने कहा कि हर देश को यह हक होना चाहिए कि वह अपने विकास का रास्ता खुद चुने। उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करना चाहिए। खासकर बड़ी ताकतों को दूसरों के लिए मिसाल बनना चाहिए। वेनेजुएला की तरह, ताइवान पर कब्जा करने की सलाह चीन के सोशल मीडिया पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर जबरदस्त हलचल और चर्चा देखने को मिली। कई लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर अमेरिका अपने (बैकयार्ड) इलाके के किसी देश के नेता को पकड़ सकता है, तो चीन ऐसा क्यों नहीं कर सकता? चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान को अपना हिस्सा मानती है। चीन ने साफ कहा है कि वह ताइवान को अपने में मिलाएगा, जरूरत पड़ी तो इसके लिए ताकत का इस्तेमाल भी करेगा। पिछले कुछ साल में बीजिंग ने ताइवान पर सैन्य दबाव लगातार बढ़ाया है, यहां तक कि उसकी नाकेबंदी का अभ्यास भी किया है। चीन का करीबी साथी है वेनेजुएला चीन और वेनेजुएला के बीच दशकों से करीबी रिश्ता रहा है। ये रिश्ते दोनों की कम्युनिस्ट विचारधारा और अमेरिका विरोध के आधार पर बना। वेनेजुएला के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा चीन जाता है। चीनी कंपनियां वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निवेश को फंड करती हैं। पिछले कई दशकों में बीजिंग ने कराकस को अरबों डॉलर का कर्ज भी दिया है। अब ट्रम्प की इस कार्रवाई ने फिलहाल इस रिश्ते को उलट-पलट कर दिया है। इससे चीन को मिलने वाले वेनेजुएला के तेल पर विशेष पहुंच और पूरे क्षेत्र में उसके राजनीतिक व आर्थिक प्रभाव के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि तेल निवेशकों और एक्सपर्ट्स का मानना है कि वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई से चीन की तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। दरअसल, वेनेजुएला के पास भले दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार हो, लेकिन अभी उसका असल उत्पादन काफी कम है। इसलिए चीन की कुल तेल जरूरत में वेनेजुएला का हिस्सा बहुत बड़ा नहीं है। अगर वेनेजुएला से तेल कम भी हुआ, तो चीन दूसरे देशों से तेल खरीद सकता है। तेल के अलावा चीन ने वेनेजुएला में बिजली, सड़क, तेल, गैस और दूसरी परियोजनाओं में निवेश किया है। 2007 से अब तक के एक दशक में चीन ने वेनेजुएला को 62.5 अरब डॉलर का कर्ज दिया। यह उस अवधि में दक्षिण अमेरिका को दिए गए कुल चीनी कर्ज का लगभग आधा है। वॉशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर के शोध के मुताबिक वेनेजुएला उस दौर में (2007-2017) चीनी फंडिंग पाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश था। क्या वेनेजुएला की तरह ताइवान पर हमला करेगा चीन सोशल मीडिया पर ऐसे दावे हैं कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से चीन को और आक्रामक होने का हौसला मिलेगा। हालांकि ताइवान में कई लोग इन आशंकाओं को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद वांग टिंग-यू ने इस विचार को खारिज किया कि चीन अमेरिका की नकल करते हुए ताइवान पर हमला कर सकता है। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, “चीन अमेरिका नहीं है और ताइवान वेनेजुएला नहीं है। यह कहना कि चीन ताइवान में वही कर सकता है संभव नहीं है।” एक्सपर्ट्स का भी यही कहना है कि चीन बहुत सोच-समझकर ही कदम उठाएगा। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक बेल्जियम के थिंक टैंक इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप से जुड़े विश्लेषक विलियम यांग मानते हैं कि वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई से ताइवान पर हमले को लेकर चीन की सोच में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। हालांकि, यांग ने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कार्रवाई से दुनिया में एक नया चलन बन रहा है, जहां देश अपने लक्ष्य पाने के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल ज्यादा करने लग सकते हैं। यांग ने CNN से कहा, “ताइवान के लिए सबक यह है कि सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल अब दुनियाभर में एक नया सामान्य बन सकता है। ताइवान को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और अपनी रक्षा क्षमता व चीन के खिलाफ रोकथाम की ताकत बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।”

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