गुमला|जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के अंतर्गत किसानों की आय बढ़ाने तथा आधुनिक कृषि तकनीकों से उन्हें अवगत कराने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र गुमला, विकास भारती बिशुनपुर एवं सीआईएसएच लखनऊ के सयुंक्त तत्वावधान में एक दिवसीय प्रशिक्षण सह फसल प्रभात (मल्टी नुट्रियंट) का वितरण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिले के जनजातीय बहुल क्षेत्र में कार्यरत किसानों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया, जिसमें उन्नत कृषि पद्धतियों, फसल सुरक्षा एवं कीट-रोग प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विकास भारती के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि जनजातीय उप-योजना का मुख्य उद्देश्य आदिवासी किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना एवं उनकी आजीविका को टिकाऊ बनाना है। मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कृषि विज्ञान केंद्र गुमला के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. वृजेश पाण्डेय ने किसानों को उन्नत फसल उत्पादन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा समय पर बुवाई के महत्व पर तकनीकी जानकारी दी। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि बदलते मौसम के अनुरूप किस्मों का चयन, सही समय पर कृषि क्रियाएं और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरक प्रयोग करने की सलाह दी, ताकि खेत की उर्वरता बनी रहे और फसल की गुणवत्ता में सुधार हो। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ अटल बिहारी तिवारी ने पादप सुरक्षा पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कीट एवं रोगों की पहचान, उनके लक्षण तथा समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) के उपायों पर प्रकाश डाला। श्री तिवारी ने बताया कि समय पर निगरानी, जैविक नियंत्रण उपायों का प्रयोग, उचित फसल चक्र अपनाने एवं आवश्यकतानुसार कीटनाशकों का संतुलित उपयोग करने से फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है। प्रशिक्षण सत्र के उपरांत किसानों के बीच फसल प्रभात का वितरण किया गया। इस दौरान उन्नत किस्मों के बीज एवं आवश्यक कृषि सामग्री किसानों को प्रदान की गई, ताकि वे अपने खेत में इनका प्रयोग कर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकें। वितरण कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने बताया कि उन्हें इस प्रकार के प्रशिक्षण से नई तकनीकों की जानकारी मिलती है, जिसका सीधा लाभ उनकी खेती पर पड़ता है। इस कार्यक्रम में कुल 34 किसानों ने सक्रिय भागीदारी की। किसानों ने प्रश्नोत्तर सत्र में अपनी समस्याओं को साझा किया, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा मौके पर ही बताया गया।


