शंकराचार्य मठ इंदौर में पूर्णिमा पर विशेष प्रवचन:सिर्फ धन से नहीं बल्कि किसी पीड़ित की तन और मन से भी कर सकते हैं भलाई- डॉ. गिरीशानंदजी महाराज

सामान्यत: दो तरह के व्यक्तियों की चर्चा होती है, एक भला आदमी और दूसरा बुरा आदमी। कहा जाता है- कर भला तो हो भला… जो व्यक्ति जीवन में दूसरों का भला करता है, उसका भला स्वयं ही हो जाता है। इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति भी खूब मिलते हैं जो भलाई के नाम पर लोगों को ठगकर अपना ही भला करते रहते हैं। सिर्फ धन से ही नहीं बल्कि किसी पीड़ित की तन और मन से सेवा करके या भावनात्मक रूप से सहयोग देकर भी भला किया जा सकता है। एरोड्रम क्षेत्र में दिलीप नगर नैनोद स्थित शंकराचार्य मठ इंदौर के अधिष्ठाता ब्रह्मचारी डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने अपने नित्य प्रवचन में बुधवार को यह बात कही। बुधवार को पूर्णिमा के अवसर पर मठ में नियमानुसार सत्यनारायण भगवान की कथा हुई। इसके बाद डॉ. गिरीशानंदजी महाराज ने आशीर्वचन दिए। संसार में चार तरह के व्यक्ति महाराजश्री ने एक दृष्टांत सुनाया- एक महात्मा थे। वे प्रवचन कर रहे थे। वे बता रहे थे- संसार में चार तरह के व्यक्ति होते हैं। एक तो वे जो न खुद का भला करते हैं, न दूसरों का भला करते हैं। दूसरे केवल अपनी भलाई चाहते हैं। तीसरे केवल दूसरों का भला करते हैं, चौथे अपने भले के साथ दूसरों का भी भला करते हैं। अब इनमें से आपको कौन सा व्यक्ति बनना है? ये आप स्वयं सोचिए। बहुत से व्यक्ति केवल अखबारों के पन्नों में ही भला करते हैं। लेकिन किसी का भला नहीं करते हैं। भला करने के प्रचार से वे केवल अपना ही भला करते हैं। दिखावे के लिए लोगों को प्रचारित करते रहते हैं कि हम गरीबों का भला करते हैं, विद्यार्थियों का भला करते हैं। जिनके पास भला करने का सामर्थ्य है, पर समय नहीं है, वे इन ठगोरों की बातों में आकर भला करने के नाम पर इन ठगोरों का भला करते रहते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए।

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