शंभू और खनौरी मोर्चे को मीटिंग के लिए भेजा न्योता:नौ फरवरी को सांसदों को देंगे मांग पत्र, 15 फरवरी को चंडीगढ़ में बनाएंगे स्ट्रेटजी

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की आज 2 फरवरी को मोहाली में एक अहम मीटिंग हुई। मीटिंग के बाद किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल व रमिंदर पटियाला ने प्रेस कांफ्रेंस में कि बताया शंभू और खनौरी मोर्चे को एकता मीटिंग के लिए 12 फरवरी का न्योता दिया गया है, लेकिन अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है। दूसरे किसानों ने तय कि 9 फरवरी को केंद्र द्वारा जारी की गई कृषि मार्केटिंग पॉलिसी ड्रॉफ्ट के खिलाफ देश के सभी लोकसभा व राज्यसभा सांसदों को मांग पत्र सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने भी वायदा किया था कि कृषि मार्केटिंग पॉलिसी के ड्रॉफ्ट को रद्द किया जाएगा, लेकिन यह बात बयानों से आगे नहीं बढ़ पाई है। उन्होंने कहा कि, हमने सरकार से मांग की है कि विधानसभा का सेशन बुलाकर इसे इसे रद्द किया जाए। ऐसे में हमने 15 तारीख को चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में मीटिंग बुलाई है। वहीं, पांच तारीख को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में मोर्चे लगेंगे। इसमें अगले संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी। वहीं, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन जारी है। वह 69 दिन से अनशन पर है। केंद्र की बैठक से पहले ताकत दिखाने की तैयारी फसलों के एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 13 मांगों को लेकर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का संघर्ष जारी है। वहीं, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन 69 दिन में प्रवेश कर गया है। वहीं, अब किसानों का फोकस इसी महीने आयोजित होने वाली तीन महापंचायतों पर है। इसके लिए पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में लोगों से बैठकें की जा रही हैं। कोशिश है कि 14 फरवरी को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक से पहले किसानों की पूरी ताकत दिखाई जाए। अब तक किसान आंदोलन में क्या-क्या हुआ? पिछले साल 13 फरवरी को किसान ने फसलों की एमएसपी समेत 13 मांगों को लेकर अपना आंदोलन शुरू किया था। क्योंकि उस समय लोकसभा चुनाव होने थे। ऐसे में केंद्र सरकार ने शुरू में तत्परता दिखाई। साथ ही तत्कालीन कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा समेत सीनियर नेता चंडीगढ़ भेजे। साथ ही सेक्टर-26 में किसान नेताओं से मीटिंग की। इन मीटिंगों में पंजाब सीएम भगवंत मान भी मौजूद रहे। यह मीटिंग देर रात दो बजे तक चलती रही थी, लेकिन जब किसानों की सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने दिल्ली जाने का फैसला लिया था। लेकिन हरियाणा सरकार ने बैरिकेड लगाकर किसानों को बॉर्डर पर ही रोक दिया। साथ ही दलील दी कि किसानों ने अपने ट्रैक्टर मॉडिफाई किए हुए हैं। अगर किसान आगे आते हैं तो राज्य का माहौल खराब होगा। इस दौरान खनौरी बॉर्डर पर पुलिस व किसानों की झड़प में युवा किसान शुभकरन सिंह की मौत हो गई। हालांकि जब किसान वहीं रुक गए तो उन दोनों रास्तों से पंजाब हरियाणा का संपर्क टूट गया। इस वजह से कारोबारियों को नुकसान होने लगा। मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया। 10 जुलाई को हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बैरिकेड खोलने के आदेश दिए तो सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईपावर कमेटी गठित की । 26 नवंबर से किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने अनशन शुरू किया। साथ ही किसी तरह की मेडिकल सुविधा न लेने का फैसला लिया। लेकिन जैसे ही संघर्ष 50 दिन पार कर गया तो केंद्र सरकार के अधिकारी खनौरी बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को मीटिंग का न्योता दिया। इसके बाद डल्लेवाल ने अनशन जारी रखने व मेडिकल सुविधा लेने का फैसला लिया। साथ ही 26 जनवरी को पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकाला।

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