प्रभारी महामंत्री गैदू बोले-एक हफ्ते का मांगा समय छत्तीसगढ़ के चर्चित 2161 करोड़ के शराब घोटाले की जांच की आंच प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम मंगलवार दोपहर राजीव भवन पहुंची। यहां ईडी के दो अफसरों ने कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू के बारे में पूछा। प्रभारी महामंत्री कहां हैं? वे उस समय कार्यालय में नहीं थे। कार्यालय से उन्हें फोन किया गया। गैदू कुछ ही देर में कार्यालय पहुंच गए। अधिकारियों ने उन्हें समन दिया और 27 फरवरी को ईडी दफ्तर में उपस्थित होने कहा गया है। उन्होंने सुकमा और कोंटा में बने राजीव भवन की जमीन खरीदी व निर्माण के संबंध में जानकारी मांगी है। जमीन की खरीदी कब हुई है? निर्माण के लिए किसे ठेका दिया गया था? ईडी ने ये भी पूछा है कि इसमें कितने का अतिरिक्त खर्च हुआ है? खरीदी और निर्माण के लिए फंड कहां से आया? पैसों का सोर्स क्या था? इसका प्रदेश महामंत्री से जवाब मांगा गया है। इस पर महामंत्री गैदू का कहना है कि सुकमा राजीव भवन का निर्माण और उद्घाटन हो चुका था। इसके बाद उन्होंने प्रभारी महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली है। इसलिए उन्हें हिसाब किताब कि कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने समन का जवाब देने के लिए ईडी से सप्ताह भर का समय मांगा है। उनका कहना है कि दो दिन का समय काफी कम है। जानकारी निकालने में समय लगेगा। पूर्व सीएम का निशाना: पाई-पाई का हिसाब देंगे, क्या ईडी 150 करोड़ रुपए के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर का हिसाब लेगी कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में ईडी के घुसने पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्रीय एजेंसी भाजपा के इशारे में कार्रवाई कर रही है। ईडी अपनी सीमा लांघ रही है। कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में ईडी का जाना और समंस देना आपत्तिजनक है। सुकमा-कोंटा का जिला कार्यालय बनाने में खर्च हुए एक-एक पैसे का हिसाब कांग्रेस देगी। 15 साल विपक्ष में रहने के दौरान कार्यकर्ताओं और जनता के सहयोग से कांग्रेस ने राजीव भवन बनाया था। जन सहयोग से कांग्रेस भवन बनाना कांग्रेस की परंपरा रही है। ईडी में साहस है तो वह भाजपा के 150 करोड़ की लागत से बने भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे का हिसाब ले। उसके लिए फंड कहां से आया। एकात्म परिसर की जमीन राजनैतिक दल के कार्यालय के लिए भाजपा ने 1 रू. में हासिल किया था। एकात्म परिसर को व्यवसायिक कांप्लेक्स में तब्दील कर दिया गया जहां से 1.5 करोड़ किराया भाजपा वसूलती है। भास्कर इनसाइट – सरकार बनने के बाद बनाया कांग्रेस जिला मुख्यालय लखमा मंत्री बने थे तभी बना सुकमा-कोंटा में राजीव भवन, ईडी ने इसी की मांगी है जानकारी प्रमोद साहू की रिपोर्ट शराब घोटाले में तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी के 40 दिनों बाद ईडी ने इस मामले की जांच तेज कर दी है। लखमा के घर से जब्त दस्तावेज और डायरी में मिले क्लू के आधार पर ईडी मंगलवार को कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच गई। लखमा के घर की डायरी में सुकमा और कोंटा में बनाए गए कांग्रेस कार्यालय का हिसाब मिला है। इसमें शराब घोटाले में लखमा को मिलने वाले कमीशन से ठेकेदार को भुगतान का जिक्र किया गया है। ईडी की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि लखमा के मंत्री बनने के ढाई साल के भीतर कोंटा और सुकमा में राजीव भवन बनाया गया है। सुकमा के भवन के लिए ठेकेदार को 1.36 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है, जबकि कोंटा के लिए 50 लाख रुपए दिया गया है। इसमें कुछ अतिरिक्त खर्च भी किया गया है। भवन में किए गए एक्स्ट्रा खर्च का हिसाब कहीं नहीं है। दोनों भवन बनाने का ठेका मंत्री के करीबी एक ठेकेदार को मिला था, उसने सुकमा के अलावा बस्तर संभाग में चार से ज्यादा पर राजीव भवन बनाए हैं। ईडी अब उस ठेकेदार की तलाश कर रही है। घोटाले के लिए त्रिपाठी की टेलीकॉम से आबकारी में पोस्टिंग: ईडी की ओर से कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के मुताबिक तत्कालीन आबकारी सचिव अरुणपति त्रिपाठी ही पूरा सिस्टम चला रहे थे। इसलिए इंडियन टेलीकॉम सर्विस से अरुणपति त्रिपाठी की पोस्टिंग आबकारी विभाग में की गई। उन्हें पहले आबकारी सचिव बनाया, फिर उन्हें छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन (सीएसएमसीएल) का प्रबंध संचालक बना दिया। उनके बाद आईएएस निरंजन दास को आबकारी आयुक्त बनाया। दोनों ने अनवर ढेबर, तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा और रिटायर्ड आईएएस अफसर विवेक ढांढ के साथ मिलकर सिंडीकेट खड़ा किया। पहले सरकार सीधे फैक्ट्री या कंपनी से विदेशी शराब खरीदती थी। वेबरेज कॉर्पोरेशन से दुकानों में सप्लाई होती थी, लेकिन लखमा के दौर में एफएल-10 लाइसेंस सिस्टम को ही बदल दिया। सरकार एफएल-10ए का नया लाइसेंस लेकर आई। यह लाइसेंस कारोबारी अनवर ढेबर के तीन करीबियों की कंपनी नेक्सजेन पॉवर इंजीटेक, श्री ओम सांई बेवरेज प्रा.लि. और दिशिता वेंचर्स प्रा. लि. को दिया गया। लाइसेंस लेने के बाद ये कंपनियां शराब बनाने वाली कंपनियों से स्टॉक खरीदती थी। उसमें अपना 10% कमीशन जोड़कर सरकार को सप्लाई करती थीं। इससे सरकार को 2161 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ है। इसी कमीशन का सिंडीकेट को 60% जाता था। यही पैसा नेताओं से लेकर अधिकारियों को मिला। इन चार बिंदुओं पर मांगी जानकारी
– सुकमा-कोंटा में राजीव भवन का निर्माण कब शुरु और कब खत्म हुआ?
– किस ठेकेदार ने भवन निर्माण का काम किया है?
– भवन निर्माण वाली जगह पर जमीन पर मूल्य कितना है?
– जमीन खरीदी के लिए कितना भुगतान किया गया?
– भवन बनाने के लिए सोर्स ऑफ फंड क्या था? हर माह कवासी को मिलते थे 2 करोड़: ईडी
ईडी का आरोप है कि शराब घोटाले में हर माह कमीशन के तौर पर तत्कालीन आबकारी मंत्री कवासी लखमा को 2 करोड़ रुपए मिलता था। आबकारी अधिकारी इकबाल अहमद ने स्वीकार किया है कि वह अलग से हर माह कमीशन के तौर पर 50 लाख रुपए पूर्व मंत्री को देते थे। जेल में बंद तत्कालीन आबकारी सचिव आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी ने कहा है कि अनवर ढेबर के माध्यम से डेढ़ करोड़ रुपए हर माह तत्कालीन मंत्री को दिए जाते थे।


