शराब घोटाला…सौम्या और निरंजन सहित 59 नए आरोपी:ED ने कोर्ट में पेश की 29,800 पन्नों की अंतिम-चार्जशीट, कुल आरोपी 81, अब ट्रायल शुरू होगा

छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में लगभग 29,800 पन्नों की अपनी अंतिम चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है। एजेंसी की अब तक की सबसे बड़ी और विस्तृत चार्जशीट मानी जा रही है। ईडी ने आज 59 और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें सौम्या चौरसिया, निरंजन दास, एफएल-10 लाइसेंस धारक, डिजिटलर्श और आबकारी अधिकारी शामिल हैं। इस घोटाले में अब तक कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। पहले 22 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट समिट की गई थी। अब तक इस मामले में लगभग 3,000 करोड़ रुपये की जब्ती की जा चुकी है। 80 से ज्यादा आरोपी चार्जशीट के दायरे में
इस अंतिम चालान में 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें पूर्व अधिकारी-कारोबारी, शराब सिंडिकेट से जुड़े लोग और कथित तौर पर लाभ पहुंचाने वाले अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं। चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वसूली, सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पेश हुआ चालान चार्जशीट में आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध वसूली, सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह चार्जशीट सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार समय पर दाखिल की गई है और इसमें डिजिटल सबूत, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और गवाहों के बयान शामिल हैं। चार्जशीट पेश होने के बाद अब ट्रायल होगा शुरू अंतिम चार्जशीट पेश होने के बाद अब कोर्ट ट्रायल शुरू करेगा। आरोपियों को चार्ज फ्रेम किए जाएंगे और उसके बाद गवाहों के बयान और सबूतों की सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, चार्जशीट की लंबाई और आरोपियों की संख्या के कारण यह केस लंबा और जटिल हो सकता है। चैतन्य बघेल के खिलाफ रायपुर कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश इससे पहले 22 दिसंबर सोमवार को छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। यह इस प्रकरण में 8वीं चार्जशीट है। EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि चैतन्य बघेल को घोटाले से 200-250 करोड़ रुपए मिले हैं। EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि सिंडिकेट के माध्यम से अवैध उगाही की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर चैतन्य बघेल से जुड़ा है। घोटाले में चैतन्य बघेल की सीधे संलिप्तता है। जांच में चैतन्य बघेल की भूमिका तत्कालीन समय में आबकारी विभाग में वसूली तंत्र (सिंडिकेट) को खड़ा करने और संरक्षक के रूप में पाई गई है। शराब घोटाला केस…सौम्या चौरसिया को ED ने किया गिरफ्तार वहीं इस मामले में ईडी (Enforcement Directorate) ने 16 दिसंबर मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रही सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के मुताबिक, पिछली सरकार के दौरान राज्य में हुए कई घोटालों में पैसों के मैनेजमेंट में उनकी अहम भूमिका रही। ईडी ने पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयान के आधार पर सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया। ED को सौम्या, रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर-चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स में कई अहम सबूत भी मिले हैं। ईडी का दावा है कि सौम्या लीकर स्कैम नेटवर्क में को-ऑर्डिनेटर की भूमिका निभा रही थीं। घोटाले से उन्हें करीब 100 करोड़ रुपए मिलने की जानकारी है। अब जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। शराब घोटाला मामले में ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। जिसमें 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि, तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है। A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई। B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना C: डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को कम/ज्यादा कर अवैध धन उगाही करना

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