शराब-डीएमएफ घोटाला:8 जिलों के 19 ठिकानों पर EOW के छापे, करोड़ों की संपत्ति के कागज मिले

प्रदेश के चर्चित 3200 करोड़ के शराब और 550 करोड़ रुपए के डीएमएफ घोटाले में ईओडब्ल्यू ने रविवार को 8 जिलों के 19 ठिकानों पर छापेमारी की। टीम सुबह 6 बजे एक साथ विभिन्न जगह पहुंची। कुछ स्थानों पर टीम को आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। कार्रवाई शाम 6 बजे तक चली। कार्रवाई के दौरान अंबिकापुर से 17 लाख नकद और अन्य जगहों से जेवर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। कुछ आरोपियों को पूछताछ के लिए ईओडब्ल्यू कार्यालय भी लाया गया है। जिनके यहां छापा पड़ा है, वे ज्यादातर अधिकारियों के रिश्तेदार हैं, जिनके नाम पर पैसे निवेश किए जाने के प्रमाण मिले हैं। ईओडब्ल्यू ने शराब घोटाले में जेल में बंद रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और निरंजन दास के परिजनों व रिश्तेदारों के यहां छापेमारी की। टीम दास के पैतृक घर जगदलपुर पहुंची, जहां उनका भाई चितरंजन दास रहता है। दूसरी टीम टीम भिलाई नेहरू नगर में बेटे अभिषेक दास और नवा रायपुर तथा दुर्ग स्थित बेटे अभिनव दास के मकानों तक पहुंची। यहां से प्रॉपर्टी के दस्तावेज जब्त किए गए। जांच के दौरान कैश भी मिला है। दूसरी टीम ने रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा के रिश्तेदार अशोक टुटेजा के रायपुर और बिलासपुर स्थित मकानों में छापा मारा। बिलासपुर में उनके रिश्तेदार मयंक बुधिया और सुभाष टुटेजा के ठिकानों की तलाशी ली गई। जांच एजेंसी के पास प्रमाण हैं कि आरोपियों ने शराब घोटाले का पैसा रिश्तेदारों के नाम पर निवेश किया है। डीएमएफ का दुरुपयोग कर घटिया क्वालिटी के सामाग्री की खरीदी डीएमएफ घोटाले में डीएमएफ फंड के दुरुपयोग और घटिया सामान की सप्लाई के आरोप हैं। इस घोटाले में निलंबित आईएएस रानू साहू को कमीशन मिला। उनसे जुड़े ठेकेदार हरपाल अरोरा के ला-विस्टा स्थित बंगले में छापा मारा गया। तलाशी में लेन-देन से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। रायपुर में ही अरुण उपाध्याय के ठिकाने पर भी दबिश दी गई। धमतरी में पूर्व विधायक जया बेन दोषी के पोते और कारोबारी केतन दोषी के महालक्ष्मी ग्रीन्स स्थित घर में भी जांच की गई। केतन रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं। अंबिकापुर में पशु चिकित्सक डॉ. तनवीर अहमद और ठेकेदार अमित अग्रवाल के घर पर तलाशी ली गई। जांच में डॉ. अहमद के घर से 17 लाख रुपए नकद और करोड़ों की संपत्ति के कागजात मिलने की चर्चा है। कोंडागांव में कारोबारी कोणार्क जैन और चोपड़ा मेटल में भी छापेमारी की गई। बिलासपुर में सुकेश माखीजा और मनोज अग्रवाल के घर तलाशी ली गई। सभी को पिछली सरकार के दौरान डीएमएफ के तहत सामग्री आपूर्ति के ठेके मिले थे और सभी पर घटिया सामग्री सप्लाई करने का आरोप है। आबकारी घोटाले में इनके यहां छापा डीएमएफ घोटाले में हरपाल अरोरा समेत इनके यहां छापे एक नजर दोनों घोटाले के बारे में शराब घोटाला
जांच एजेंसी के अनुसार छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला तीन स्तर पार्ट-ए, पार्ट-बी और पार्ट-सी में हुआ। पार्ट-ए में शराब के लिए बनाए गए सिंडीकेट को कमीशन दिया जाता था। पार्ट-बी में डिस्टलरी मालिकों को अवैध शराब से सबसे ज्यादा मुनाफा हुआ। इसमें 560 रुपए प्रति पेटी कमीशन लिया जाता था। इस बाद में बढ़ाकर 600 रुपए प्रति पेटी कर दिया गया। डीएमएफ घोटाला
डीएमएफ में अधिकारियों ने 40% तक कमीशन लेकर ठेकेदारों को काम दिया गया है। ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को 25-40% तक कमीशन लिया है। उसके बाद बिल पास कराने के लिए कमीशन लिया गया। इसलिए ठेकेदारों ने घटिया क्वालिटी के सामान की सप्लाई की है। इसमें 550 करोड़ का घोटाला हुआ है। डायरी के तथ्यों के आधार पर 5 साल बाद भी छापे एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार आईएएस रानू साहू, अनिल टुटेजा, निरंजन दास के घर से मिली डायरी व लेन-देन की रिपोर्ट के आधार पर छापेमारी की जा रही है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है। नए खुलासे हो रहे है। अधिकारियों ने भ्रष्टाचार का पैसे अपने रिश्तेदार, करीबी कारोबारी व परिचितों के नाम पर निवेश किया है। अपने पद का फायदा उठाकर ठेका दिया है। इस घोटाला में निरंजन दास को 20 करोड़, अनिल टुटेजा को 65 करोड़ और रानू को 57.58 करोड़ रुपए कमीशन मिला है। शराब कारोबार में ट्रांसपोर्टिंग, बॉटलिंग, कार्टून, रद्दी, टूट-फूट और ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी अतिरिक्त पैसा वसूली की गई थी। यह कमीशन ठेकेदार व सिंडीकेट के माध्यम से मिला है। इसके अलावा अलग-अलग माध्यम से भी इनके पास पैसा पहुंचाया गया है। इसकी जांच की जा रही है।

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