जोधपुर के मथुरादास माथुर (MDM) अस्पताल में 23 साल की युवती के हार्ट में आर्टिफिशियल वॉल्व लगाया गया है। युवती का शरीर पिछले 2 सालों से बार-बार नीला पड़ रहा था। उसे सांस लेने में भी तकलीफ होती थी। चेकअप किया तो मालूम चला कि उसके हार्ट में जन्म से ही एक वॉल्व नहीं है। 5 घंटे चले ऑपरेशन के बाद अब युवती अपना जीवन सामान्य तरीके से जी सकेगी। डॉ. अभिनव सिंह ने बताया कि हार्ट की विकृत टेट्राइलोजी ऑफ फेलो के साथ एब्सेंट पलमोनरी वॉल्व की यह दुर्लभ बीमारी है। यह 4 लाख में से 4 बच्चों को होती है। इसके शिकार बच्चों को हार्ट फेल्योर का खतरा रहता है। 10 दिन पहले MDM लाए थे असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अभिनव सिंह ने बताया- ब्यावर की 23 साल की युवती को सीने में दर्द, सांस फूलना और शरीर नीले पड़ने की समस्या के चलते 10 जनवरी को MDM अस्पताल लाया गया था। वह इस समस्या से पिछले 2 सालों से पीड़ित थी। इस दौरान परिजन उसे कई जगहों पर इलाज के लिए ले गए। लेकिन, कोई राहत नहीं मिलने पर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में लेकर आए। यहां पर जांच में उसके हार्ट में एक वॉल्व नहीं होने की पुष्टि हुई। इसके बाद हार्ट की करेक्टिव सर्जरी और वाल्व इम्प्लांटेशन करने का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन के लिए अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डॉ. सुभाष बलारा के नेतृत्व में डॉ. अभिनव सिंह, डॉ. देवाराम, डॉ. अमित सहित अन्य की टीम बनाई गई। शनिवार को ऑपरेशन किया गया था, इसके बाद 2 दिन से युवती डॉक्टरों के ऑब्जर्वेशन में है। जन्म से ही होती है जानलेवा बीमारी डॉ. अभिनव सिंह ने बताया- इस दुर्लभ बीमारी में हार्ट के वेंट्रीकल लेवल में छेद होता है। हार्ट का दाहिना हिस्सा जहां से खून की धमनी फेफड़ों की तरफ जाती है। वहां पर मांसपेशियों का गुच्छा होता है। इसके चलते फेफड़ों में खून की सप्लाई पूरी नहीं हो पाती है। इसके चलते इस तरह के बच्चे जन्म के बाद ही नीले पड़ जाते हैं। समय पर ऑपरेशन नहीं होने की वजह से यह जानलेवा भी साबित होता है। ऑपरेशन में लगे 5 घंटे डॉ. अभिनव सिंह ने बताया- इस ऑपरेशन को करने में करीब 5 घंटे का समय लगा। मरीज के चार वॉल्व में से हार्ट में एक वॉल्व जन्म से ही मौजूद नहीं था। ऐसे में डॉक्टरों ने हार्ट के छेद को हार्ट की झिल्ली पेरिकार्डियम से बंद किया। हार्ट के दाहिने वाले हिस्से से मांसपेशियों के गुच्छे को हटाया गया और पलमोनरी वालों की जगह पर आर्टिफिशियल बायो प्रोस्थेटिक वाॅल्व लगाया गया। जिससे खून का बहाव फेफड़ों की तरफ सुचारू रूप से होता रहे। डॉ. सिंह ने कहा- फेफड़ों की तरफ खून ले जाने वाली महा धमनी पल्मोनरी आर्टरी काे भी चौड़ा किया गया। इस पूरे ऑपरेशन को बाईपास मशीन पर किया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज को सीटीआई आईसीयू में शिफ्ट किया गया। जहां सारे पैरामीटर नॉर्मल होने के बाद मरीज को वेंटिलेटर से हटाया गया। उन्होंने बताया कि युवती मैरिज कार्डियो थोरेसिक वार्ड में भर्ती है। जहां पर उसकी सभी जांच ब्लू पैरामीटर ईको कार्डियोग्राफी नॉर्मल है। एहतियातन उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। यह पूरा ऑपरेशन मुख्यमंत्री चिरंजीवी चिकित्सा योजना के तहत निशुल्क किया गया।


