निगम चुनाव में राजधानी के ज्यादातर वार्डों में औसत मतदान भले ही 50 फीसदी के भीतर ही रहा, लेकिन लगभग 10 वार्ड के सात-आठ बूथ ऐसे हैं जहां के 60 से 70 फीसदी तक मतदान हुआ। ये ऐसे वार्ड हैं जहां निर्दलियों ने भाजपा और कांग्रेस को चुनौती दी। यानी यहां मुकाबला त्रिकोणीय था। निर्दलियों की दमदार उपस्थिति से मतदान का आंकड़ा बढ़ गया।
वहीं शहर के 11 वार्ड ऐसे हैं जहां सबसे कम मतदान हुआ। इन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर थी। यहां निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे, लेकिन दमखम से नहीं। इसके अलावा आउटर के वार्डों में भी कम मतदान हुआ। ये वार्ड गांव की सीमा से सटे हैं। वहां निगम के साथ ही पंचायत चुनाव भी हो रहे हैं। इन वार्डों के मतदाता निगम के बजाय पंचायत चुनाव में फोकस कर रहे हैं, क्योंकि शहर दूर और गांव पास है।
निगम चुनाव में इस बार उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह बांटने के बाद प्रचार-प्रसार के लिए 10 दिन से ज्यादा नहीं मिले। कम दिन मिलने के कारण ही मतदाताओं तक पर्ची पहुंचाने का सबसे प्रमुख और बड़ा काम नहीं हुआ। प्रशासन के अफसरों ने भी लापरवाही की। प्रशासन की ओर से पर्ची ही नहीं बांटी गई। नियमानुसार हर चुनाव में प्रशासन की ओर से शासकीय पर्ची लोगों के घरों तक पहुंचाई जाती है। इस बार ऐसा नहीं किया गया। निर्दलीय प्रत्याशियों ने किसी भी वार्ड में पर्ची नहीं बांटी, क्योंकि उनके पास ज्यादा टीम नहीं थी। भाजपा-कांग्रेस के ज्यादातर प्रत्याशियों ने भी इस काम को गंभीरता से नहीं लिया। परिसीमन की वजह से वार्ड प्रभावित थे। ऐसे में लोगों को भी समझ नहीं आया कि उन्हें वोट कहां देना है। दावा किया जा रहा है कि एक भी वार्ड ऐसा नहीं है जहां मतदाता पर्ची 60 से 100 फीसदी तक बंटी हो। सीधा मुकाबला फिर भी प्रत्याशी बूथों तक नहीं ला पाए वोटरों को
शहर के 11 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला था। इसमें वार्ड नंबर 3, 5, 14, 22, 33, 41, 45, 47, 48, 57 और 65 ऐसे वार्ड हैं जहां केवल कांग्रेस और भाजपा के ही उम्मीदवार है। इसमें एक-दो वार्डों को छोड़कर किसी भी वार्ड में मतदान ज्यादा नहीं हुआ। कुछ वार्ड ऐसे हैं जहां मतदान प्रतिशत 45 फीसदी से आगे नहीं बढ़ा। महिर्षि वाल्मिकी वार्ड में भाजपा-कांग्रेस के साथ केवल एक निर्दलीय महिला उम्मीदवार मैदान में थी। यहां के कई मतदान केंद्रों में 16.29 फीसदी वोट पड़े। डॉ. भीमराव अंबेडकर वार्ड के अधिकतर केंद्रों में 23 से 24 प्रतिशत और पं. मोतीलाल नेहरू वार्ड के मतदान केंद्रों में 25.28 फीसदी मतदान हुआ। निर्दलीय मजबूत, इसलिए इन वार्डों में ज्यादा वोटिंग
पड़ताल में पता चला है कि पं. रविशंकर शुक्ल वार्ड के कई मतदान केंद्रों में 60 से 67 फीसदी तक वोटिंग हुई। इस वार्ड से दो पूर्व पार्षद आकाश तिवारी निर्दलीय और कामरान अंसारी कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। यति यतन लाल वार्ड के बूथों में भी 68.30 तक मतदान हुआ। इस वार्ड से पूर्व पार्षद और पहले भी निर्दलीय चुनाव लड़ चुके उम्मीदवार फिर से मैदान में हैं। वामनराव लाखे वार्ड से पूर्व पार्षद विजेता मन्नू यादव निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उनकी वजह से यहां मतदान का प्रतिशत बढ़ा। डॉ. विपिन बिहारी सूर वार्ड के कई मतदान केंद्रों में 70.27 फीसदी मतदान हुआ। यहां पूर्व पार्षद मनोज वर्मा भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रत्याशी के अलावा यहां निर्दलीय मनोज चक्रधारी और अरुण निर्मलकर मैदान में हैं। दोनों लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। इस वजह से चतुषकोणीय हो गया है। महंत लक्ष्मीनारायण दास के कई मतदान केंद्रों में 72.58 फीसदी वोट पड़े। यहां पूर्व पार्षद जितेंद्र अग्रवाल निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है। शहर के तीन वार्डों में 8-8, वार्ड क्रमांक- 43 और 61 में 9-9 और वार्ड क्रमांक- 51 और 56 में 10-10 उम्मीदवार मैदान में थे। इन वार्डों के के बूथों में भी वोट ज्यादा पड़े।


