शहरी सरकार:70 वार्डों में रोज 10 हजार से ज्यादा म​हिलाएं रैली में घूम रही, सोशल मीडिया भी हावी, बैनर-पोस्टर की लड़ाई तेज

​शहरी सत्ता के लिए जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आती जा रही है प्रचार की लड़ाई तेज होती जा रही है। निगम चुनाव अब पूरे अपने रंग में आ गया है। शहर के 70 वार्डों में रोजाना 10 हजार से ज्यादा महिलाएं रैली में घूम रही है।
एक वार्ड में औसतन 100 महिलाओं को रैली में शामिल किया जा रहा है। इसके लिए प्रति महिलाएं 300 से 500 की रोजी दी जा रही है। कोई भी वार्ड की गली ऐसी नहीं जहां बैनर, पोस्टर और पंपलेट नहीं है। प्रत्याशी डोर टू डोर जनसंपर्क कर रहे हैं। हर रैली में ढोल, पटाखे और फूलों का होना तय है। इस वजह से इनकी कीमत भी बढ़ गई है। एक दिन के लिए ढोल करने पर तीन से पांच हजार रुपए तक लग रहे हैं। पटाखों की दुकानों में भी कार्यकर्ताओं की भीड़ बढ़ गई है। प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में रामायण के पात्रों को रखने के साथ ही जनचौपाल, नाचा, जादू का शो समेत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रख रहे हैं। पार्षद चुनाव के लिए इस बार प्रचार हाईटेक भी होता जा रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है जब निगम चुनाव के लिए वोटर पर्ची निकालने हाईटेक मशीन और एप का उपयोग कि जा रहा है। यह खास तरह का एप है जिसमें वार्ड की मतदाता सूची को महिला, पुरुष, गृहिणी और नौकरीपेशा वोटरों का वर्गीकरण के साथ लिस्ट निकाली जा सकती है। इस खास मशीन में 30 रुपए का एक रोल डालने पर करीब 150 मतदाता सूची एक साथ प्रिंट हो जाती है।
मतदाताओं को हाथों हाथ पर्ची देने वाली यह मशीन ब्लूटूथ से जितने चाहे उतने मोबाइल से कनेक्ट हो जाती है। इस मशीन और एप को प्रत्याशियों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके लिए 8000 से 15 हजार रुपए तक का चार्ज लिया जा रहा है। रोजाना बल्क में एसएमएस और फोन कॉल के लिए 7000 से 10 हजार रुपए तक लिया जा रहा है। निगम चुनाव की वजह से बाजार भी तेज हो गया है। क्योंकि लोगों के हाथों में खर्च के लिए पैसे आ रहे हैं। 11 वार्ड ऐसे जहां भाजपा और कांग्रेस ही मैदान में
शहर के 11 वार्ड ऐसे हैं जहां केवल कांग्रेस और भाजपा के ही उम्मीदवार मैदान में है। इन वार्डों में एक भी निर्दलीय या दूसरी पार्टी का उम्मीदवार नहीं है। 16 वार्ड ऐसे हैं जहां केवल तीन-तीन उम्मीदवार हैं। तीन वार्डों में 8-8 और दो वार्ड 43 और 61 नंबर में 9-9 प्रत्याशी हैं। सबसे ज्यादा उम्मीदवार वार्ड 51 और 56 में 10-10 हैं। जिन वार्डों में 7 से 10 उम्मीदवार हैं वहां सबसे ज्यादा प्रचार सामग्री खपाई जा रही है। इन मोहल्लों में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक ढोल, रैली और जुलूस के साथ ही प्रचार वाले ऑटो घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। ईवीएम एक, वोट 2, मतदाता नहीं प्रत्याशी भी उलझ रहे
निगम चुनाव में पहली बार ऐसा हो रहा है जब एक ईवीएम मशीन में महापौर और पार्षद के लिए एक साथ वोट डाले जा रहे हैं। आयोग के अनुसार एक बार पार्षद या महापौर के लिए बटन दबाएंगे तो धीमी आवाज लंबी बीप बजने पर ही मेयर और पार्षद दोनों को वोट मिलेगा। इसे लेकर मतदाता काफी कंफ्यूज हो रहे है। प्रत्याशियों को भी समझ नहीं आ रहा है कि इसका डेमो कैसे दें। प्रशासन की ओर से भी अब तक इस सिस्टम को लेकर कोई खास प्रचार नहीं किया गया है। इवीएम मशीन में महापौर प्रत्याशियों नाम सफेद और पार्षदों के नाम पिंक कलर में रहेंगे। पार्षद वाला बटन पहले दबाएंगे तो उसमें धीमी आवाज निकलेगी। लेकिन जब महापौर के लिए बटन दबाएंगे तो लंबी बीप बजेगी। इसके बाद ही कंफर्म होगा कि दोनों वोट एक साथ हुए हैं। यह मतदाता पर निर्भर रहेगा कि वो पहला बटन कौन सा दबाता है। लेकिन यह ध्यान रखना ही होगा कि लंबी बीप बजेगी तभी वोट मान्य होगा। ईवीएम में प्रत्याशी के बटन के सामने ही उसका फोटो व नाम दोनों रहेगा।

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