झुंझुनूं शहर इन दिनों आवारा कुत्तों के खौफ में जी रहा है। सड़कों पर निकलना आम आदमी के लिए चुनौती बन गया है, कुत्तों के झुंड राहगीरों पर टूट पड़ते हैं। बाइक सवारों को तो विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है, जिससे गंभीर चोटें लग रही हैं। राजकीय BDK हॉस्पिटल के आंकड़ों से पता चलता है कि 2025 में डॉग बाइट के 2578 मामले सामने आए, जिनमें 835 बच्चे शामिल हैं। बीडीके अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, दिसम्बर में ही 300 से ज्यादा लोग कुत्ते के काटने से घायल होकर इलाज के लिए पहुंचे। पूरे साल की बात करें तो 2024 की तुलना में 400 ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या झुंझुनूं की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। शहर के प्रमुख मार्गों पर कुत्तों के झुंड घूमते नजर आते हैं। कुत्ते अचानक हमला करते हैं, खासकर रात में बाइक सवारों पर। सुबह और शाम के समय ये झुंड बनाकर राहगीरों, बच्चों के स्कूल जाते समय या लोगों के टहलने के दौरान झपट पड़ते हैं। कई वार्डों में हालात इतने खराब हैं कि अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरते हैं। हॉटस्पॉट क्षेत्र जहां हर कदम पर खतरा शहर के व्यस्त इलाके अब ‘डॉग जोन’ बन चुके हैं। दो नंबर रोड, स्टेशन मार्ग, चूरू मार्ग, हवाई पट्टी क्षेत्र, बीडीके अस्पताल के पीछे, सर्किट हाउस के पास, चूरू बाईपास, रीको इलाका, बाकरा मोड़, टीवीएस शोरूम मोड़, रानी सती मार्ग, मून बाग, रोडवेज बस स्टैंड, मंड्रेला सर्किल और नेहरू सर्किल जैसे प्रमुख स्थानों पर घटनाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं। यहां कुत्तों के झुंडों ने आतंक मचा रखा है, और बाइक सवारों को गिराकर गंभीर चोट पहुंचाई जा रही है। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन इलाकों में शाम ढलते ही सड़कें सुनसान हो जाती हैं। जुलाई और दिसम्बर बढ़े मामले डेटा से साफ है कि समस्या सालभर बढ़ती गई, खासकर जुलाई और दिसंबर में मामले चरम पर पहुंचे। बीडीके अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, हर दिन औसतन 8 लोग कुत्तों के हमले से घायल हुए। कुल 2578 मामलों में 1310 पुरुष, 433 महिलाएं, 589 बालक और 246 बालिकाएं शामिल हैं। 792 मामले गंभीर थे, जहां खून निकलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया। जनवरी से दिसंबर 2025 तक के मासिक डॉग बाइट केस रेस्क्यू सेंटर और नसबंदी अभियान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए नगर परिषद ने शहर में स्ट्रीट डॉग्स पर नियंत्रण के लिए कदम उठाया है। नगर परिषद परिसर में डॉग रेस्क्यू सेंटर शुरू किया गया, जहां हिंसक कुत्तों का इलाज और नसबंदी की जा रही है। अब तक 20 से ज्यादा कुत्तों का उपचार किया गया और 22 की नसबंदी हो चुकी है। आयुक्त देवीलाल बोचल्या ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों को कुत्तों से मुक्त बनाने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। नगर परिषद इस अभियान पर सालाना 50 लाख रुपये खर्च करेगी। BDK हॉस्पिटल में हर सुविधा बीडीके अस्पताल में भी डॉग बाइट पीड़ितों के लिए विशेष सुविधा शुरू की गई है, जहां वैक्सीन और एंटी-रैबीज सीरम उपलब्ध है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू कहते हैं, “ऊपरी हिस्से जैसे गर्दन या चेहरे पर काटने से रैबीज का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सभी 5 डोज सीरम लगवानी चाहिए। बाइट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचें, क्योंकि संक्रमण तेजी से फैलता है।


