राजधानी के 32 में 18 थानों के लैंडलाइन फोन बंद हैं। 14 थाने के फोन चालू हैं, लेकिन पांच थाने के स्टाफ ही कॉल रिसीव कर रहे हैं। भास्कर टीम ने दो दिन हर थाने का लैंड लाइन फोन लगाने का प्रयास किया। रविवार को टीम ने नौ थानों के परिसर में खड़े होकर लैंडलाइन फोन में कॉल लगाया। घंटी बजती रही, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया, जबकि थाने में उस समय मुंशी सहित आधा दर्जन से ज्यादा सिपाही उपस्थित थे। यही वजह है कि राजधानी में घटना होने के लंबे समय बाद पुलिस पहुंच रही है। चाकूबाजी की घटनाएं अचानक से बढ़ गई हैं। गंभीर सड़क हादसों में भी समय से पुलिस न पहुंच पाने की वजह से मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है। डीजीपी भी डांट चुके
पुलिस के रिस्पांस टाइम और कंट्रोल रूम में फोन नहीं उठाने को लेकर डीजीपी अशोक जुनेजा और खुफिया चीफ अमित कुमार कई जिलों के एसपी को डांट चुके हैं। उन्होंने खुद कई जिलों के कंट्रोल रूम में फोन किया, लेकिन वहां या तो रिस्पांस नहीं मिला या नंबर बंद थे। उन्होंने व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया था।
भास्कर लाइव – रिपोर्टर ने थाने के सामने खड़े होकर लगाया फोन, बजती रही घंटी देवेंद्र नगर थाना
दोपहर 2 बजे। लैंडलाइन नंबर 0771-424712 पर फोन करते हुए भास्कर टीम थाने पहुंची। फोन की घंटी बज रही थी, लेकिन किसी ने उठाया नहीं। मुंशी के टेबल पर फोन दिखाई नहीं था, लेकिन रिंग जा रही थी। थाना में आधा दर्जन स्टाफ मौजूद था। कोई मोबाइल फोन पर व्यस्त था। कुछ दो घंटे बाद फिर इसी नंबर पर फोन किया। इसके बाद भी रिस्पांस नहीं मिला। सरस्वती नगर थाना
रविवार दोपहर 3 बजे। भास्कर टीम ने लैंडलाइन नंबर 0771-4045100 पर फोन किया। मोबाइल पर फोन रिंगटोन सुनाई दी, लेकिन फोन नहीं दिखा। मुंशी टेबल पर थे और रोजनामचे में कुछ लिख रहे थे। काफी देर तक वहां चेक करने के बाद भी फोन दिखाई नहीं दिया। ऐसा अहसास हुआ जैसे फोन की रिंग टोन कम कर ऐसी जगह रख दिया है जहां से दिखाई न दे। उरला थाना
शाम 5 बजे। लैंडलाइन नंबर 0771-4247132 पर फोन करने के बाद भास्कर टीम थाने के अंदर पहुंची। थाने के मुख्य हॉल में मुंशी के टेबल पर ही फोन रखा था। फोन की रिंग बज रही थी, लेकिन मुंशी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। मुंशी टेबल में बैठे थे। थाने में एक एएसआई सहित बाकी स्टाफ थे। किसी ने फोन नहीं उठाया।
सिविल लाइन : सुबह 11 बजे। यहां के लैंडलाइन नंबर 0771-4247123 पर फोन किया गया किसी ने रिसीव नहीं किया। फिर शाम 7 बजे थाना परिसर में खड़े होकर फिर फोन किया। दोनों बार फोन की घंटी बजती रही। टेबल पर मुंशी और मददगार दोनों बैठे थे, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। थाने का बाकी स्टाफ अंदर बाहर हो रहा था। थानेदार ने खुद स्वीकार किया कि थाने का लैंड लाइन नंबर चालू है। क्यों जरूरी है थानों में फोन
थानों में सीधे सूचना मिलने से पुलिस तुरंत पहुंचती है, क्योंकि थाने के स्टाफ को हर गली-मोहल्ले और सड़कों की जानकारी होती है। वहीं डायल 112 से सूचना इमरजेंसी एक्सप्रेस को भेजी जाती है। इसके बाद जीपीएस से घटनास्थल का लोकेशन ढूंढते हुए टीम पहुंचती है। इसमें समय लगता है। यहां नंबर बंद : कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा, पुरानी बस्ती, करीब नगर, आमानाका, पंडरी-मोवा, तेलीबांधा, तिल्दा-नेवरा, विधानसभा, खरोरा, अभनपुर, राखी, नवापारा, मंदिर हसौद, आरंग, धरसींवा, गुढियारी।
यहां नहीं उठा फोन: डीडी नगर, राजेंद्र नगर, सरस्वती नगर, माना, उरला, सिविल लाइन, आजाद चौक, देवेंद्र नगर, आजाद चौक। टीआई सरकारी नंबर पर फोन उठाते हैं। कुछ थानांे मंे लैंडलाइन खराब है। इसकी जानकारी मिली है। सुधारने का निर्देश दिए हैं।
डॉ. लाल उमेद सिंह, एसएसपी


