लुधियाना| विद्या और बुद्धि की देवी मां सरस्वती के स्वागत में बुधवार को लुधियाना का गुरु नानक देव भवन सुरों की त्रिवेणी बन गया। मां सरस्वती सेवा संघ और पंजाब के समस्त कलाकारों द्वारा आयोजित एक शाम मां सरस्वती के नाम समागम ने शहरवासियों को भक्ति के ऐसे सागर में डुबोया कि हर कोई मंत्रमुग्ध नजर आया। स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इस बार का कार्यक्रम सिल्वर जुबली के रूप में बेहद भव्य तरीके से मनाया गया। समागम का आगाज पारंपरिक विधि-विधान के साथ दीप प्रज्वलन और मां शारदे के विशेष पूजन से हुआ। वक्ताओं ने बसंत पंचमी की महत्ता बताते हुए कहा कि यह पर्व अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। मंच संभालते ही गायकों ने एक के बाद एक सुरीले भजनों और वंदनाओं की झड़ी लगा दी। लुधियाना के स्थानीय कलाकारों ने जब अपनी गायकी से सुर छेड़े तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमते रहे और देर रात तक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा। इस मौके पर आध्यात्मिक, सामाजिक और राजनीतिक गलियारों की प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। संत समाज और विभिन्न मंदिर ट्रस्टों के प्रतिनिधियों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन को सफल बनाने में चेयरमैन कुमार संजीव व प्रधान जतिंदर पाल सिंह हैप्पी राजा की मुख्य भूमिका रही। इस दौरान दविंदर सूद, पं. अजय वशिष्ठ और पं. विजय शर्मा मौजूद रहे। सभी गणमान्य अतिथियों ने सेवा संघ के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे कला और संस्कृति को सहेजने वाला एक अनुकरणीय प्रयास बताया।


