शाजापुर में शुक्रवार दोपहर जिला कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने अपर कलेक्टर बी.एल.सोलंकी को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से संबंधित था। कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज करने के अधिकार, प्रक्रिया और आवश्यक प्रमाणों को लेकर स्पष्टीकरण और निष्पक्ष जांच की मांग की है। मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया से पैदा हो रहा भ्रम कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान में मतदाता सूची के सत्यापन और आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया से आम मतदाताओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उनका कहना है कि कालापीपल विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तर पर पदस्थ बीएलओ यह जानकारी दे रहे हैं कि उन्हें तहसीलदार कार्यालय से एक सूची मिली है। इस सूची में दर्ज नामों पर यह कहकर जांच के निर्देश दिए गए हैं कि इन पर आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि यह स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है कि ये आपत्तियां किसके द्वारा, किस आधार पर और किन दस्तावेजों के साथ दर्ज की गई हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग के निर्देशों का हवाला देते हुए बताया कि मतदाता सूची पर आपत्ति केवल स्थानीय बूथ के मतदाता या मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) द्वारा ही की जा सकती है। बिना स्थानीय आधार के आपत्तियां स्वीकार करना नियमों के विपरीत पार्टी ने जोर दिया कि किसी बाहरी व्यक्ति, अज्ञात स्रोत या प्रशासनिक स्तर से बिना स्थानीय आधार के आपत्तियां स्वीकार करना नियमों के विपरीत है। साथ ही, आपत्ति दर्ज करने के लिए निर्धारित प्रपत्र (फॉर्म 7, 8 या 8ए) और ठोस दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य होते हैं। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि जब बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मैपिंग और सत्यापन की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है, तब उन्हीं नामों पर आपत्तियों का आना संदेह पैदा करता है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पहले संबंधित बीएलओ से स्पष्टीकरण लिया जाए, उसके बाद ही मतदाताओं से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएं। इस दौरान कांग्रेस नेतृत्व ने प्रशासन को 2003 की एक सूची भी सौंपी, जिसमें नाम कटने वाले मतदाताओं की जानकारी थी। कांग्रेस ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की, ताकि मतदाता सूची की प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद बनी रहे


