शादी से पहले उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता : हाईकोर्ट

चाईबासा सदर अस्पताल में नाबालिग बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में पुलिस के प्राथमिकी दर्ज नहीं किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। पीड़ित परिवार के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा है कि यह गंभीर लापरवाही का मामला है, जो बच्चों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने लापरवाही के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की है, जबकि यह एक गंभीर आपराधिक कृत्य है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और रक्त सुरक्षा प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है। इसलिए इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाए। विशेष संवाददाता|रांची झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े फैमिली कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दाखिल मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय की अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि विवाह से पहले पत्नी द्वारा अपनी उम्र और आपराधिक पृष्ठभूमि जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना पति के साथ मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। अदालत ने कहा है कि ऐसी स्थिति में वैवाहिक संबंध निभाना संभव नहीं है। अदालत ने इस निर्देश के साथ तलाक के खिलाफ पत्नी की अपील याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के तलाक दिए जाने के आदेश को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट का निर्णय न तो मनमाना है और न ही साक्ष्यों के विपरीत। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह विश्वास पर आधारित होता है और यदि शुरुआत में ही महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया जाए, तो यह मानसिक क्रूरता मानी जाएगी। ऐसे में फैमिली कोर्ट के आदेश में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरुरत नहीं है। गुमला जिले से जुड़े इस मामले में पति ने वर्ष 2022 में फैमिली कोर्ट गुमला में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के तहत तलाक की याचिका दाखिल की थी। पति ने आरोप लगाया था कि 15 अप्रैल, 2019 को हुई शादी से पहले पत्नी ने अपनी वास्तविक उम्र और आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई। पति का कहना था कि पत्नी की उम्र लगभग 40 वर्ष थी जबकि शादी के समय 27 वर्ष बताई गई। इसके अलावा पत्नी हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा पा चुकी थी और जमानत पर बाहर थी। इस बात की जानकारी भी विवाह से पहले नहीं दी गई। पति ने आरोप लगाया कि शादी के बाद पत्नी उसे और उसके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देती थी। हालांकि, सुनवाई दौरान पत्नी ने फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों में आरोपों से इंकार किया। लेकिन अदालत ने पत्नी की ओर से दाखिल अपील याचिका को खारिज कर दिया। रांची| झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड में अंतिम जमानत मिलने के बावजूद एक युवक को अगवा करके अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की अदालत ने सरकार से पूछा कि युवक को कब हिरासत में लिया गया और कब छोड़ा गया ? किस मामले में और कब उसे खूंटी थाना भेजा गया? इस दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कांके थाना प्रभारी से स्पष्टीकरण की मांग की गई थी। थाना प्रभारी ने स्पष्टीकरण दे दिया है। इस पर अदालत ने पुलिस को विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित की है। अदालत ने युवक के परिजनों को खूंटी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करने के लिए कहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के निर्देश पर रांची के एसएसपी, कांके और खूंटी के थाना प्रभारी कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए। थाना प्रभारी की ओर से अदालत को बताया गया कि देवव्रत नाथ शाहदेव को न तो अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और न ही किसी प्रकार की जबरदस्ती की गई। कांके थाना क्षेत्र के एक मामले में देवव्रत नाथ शाहदेव अप्राथमिक अभियुक्त है। इस मामले में उन्हें अग्रिम जमानत मिली है। इस कांड का मुख्य अभियुक्त अभिषेक सिन्हा उर्फ सूरज सिन्हा फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि देवव्रत नाथ शाहदेव का संपर्क फरार अभियुक्त से बना हुआ है। वह उसे आर्थिक सहयोग भी दे रहा है। साक्ष्य को प्रभावित करने और गवाहों को धमकाने की भी आशंका जताई गई है। मालूम हो कि देवव्रत नाथ शाहदेव के पिता दामोदर नाथ शाहदेव ने हैवियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल की है। मंगलवार को मामले पर सुनवाई हुई थी।

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