गंजबासौदा स्टेशन रोड स्थित नौलखी मंदिर में सनातन धर्म सेवा संस्थान की ओर से पांच दिवसीय गीता जयंती महोत्सव हो रहा है। तीसरे दिन शनिवार को गीता मर्मज्ञ भागवताचार्य पंडित भगवान प्रसाद शास्त्री ‘मानस रत्न’ ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत चित्र प्रधान नहीं, बल्कि चरित्र प्रधान देश है। शास्त्री जी ने बताया कि गीता कर्मयोग सिखाती है, जबकि रामचरितमानस मर्यादा का मार्ग दिखाती है। भागवताचार्य पंडित बोले-निर्मल चरित्र ही मनुष्य का वास्तविक धन शास्त्री जी ने अपने प्रवचन में समझाया कि निर्मल चरित्र ही मनुष्य का वास्तविक धन है। यह जीवन की रक्षा करता है, व्यक्ति को परमात्मा से जोड़ता है और जन्म-जन्मांतर की दिशा बदल देता है। उन्होंने यह भी बताया कि चरित्र तब विचलित होता है जब मनुष्य धर्म से दूर हो जाता है और उसका मन व बुद्धि विकारों में डूब जाती है। इस संदर्भ में गीता का संदेश है कि मन को संयमित किया जाए, बुद्धि को निर्मल बनाया जाए और धर्म को जीवन का केंद्र बनाया जाए। ऐसा करने से ही भीतर चरित्र का प्रकाश जागृत होता है और व्यक्ति विकारों से ऊपर उठ पाता है। पंडित बोले-जहां निर्मलता बसती है, वहीं प्रभु का निवास होता है शास्त्री जी ने आगे कहा कि यदि मनुष्य का चरित्र बिगड़ जाए तो उसका केवल इस जन्म का ही नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर का पतन हो जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चरित्र का पतन आत्मा को अंधकार की ओर ले जाता है और सद्गुणों से दूर कर देता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिसका चरित्र निर्मल होता है, उसका मन भी निर्मल हो जाता है, और जहां निर्मलता बसती है, वहीं प्रभु का निवास होता है। मन निर्मल होने पर ही ईश्वर उसमें वास करेगा और तभी हर कार्य समान, संतुलित और सत्य बन सकेगा। इसी अवसर पर शनिवार को नौलखी मंदिर में पंद्रह दिवसीय नर्मदा परिक्रमा की तपोयात्रा पूर्ण कर नगर लौटे परिक्रमा वासियों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया। इस समारोह में विधायक हरि सिंह रघुवंशी ने सभी परिक्रमा वासियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।


