शाही खर्च को GST में आम दिखा रहे:पहली बार… होटल, कैटरिंग वालों के रिटर्न में गड़बड़ी, 5000 मामले संदिग्ध

सेंट्रल और स्टेट जीएसटी विभाग वाले अब व्यापारियों के रिटर्न की जांच में एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है जब हाईटेक डिजिटल टूल्स, ई-वे बिल पोर्टल के साथ आईपी एड्रेस का एनालिसिस किया जा रहा है। इससे इस बात की तुरंत जानकारी मिल रही है कंप्यूटर या लैपटॉप को किस शहर में रखकर दूसरे राज्यों के बिल काटे जा रहे हैं। इस नई तकनीक के इस्तेमाल के बाद 5000 से ज्यादा कारोबारियों के जीएसटी रिटर्न संदिग्ध मिले हैं। ऐसे सभी कारोबारियों को नोटिस भेजने का सिलसिला शुरू हो गया है। इसमें पहली बार इवेंट मैनेजमेंट, होटल, कैटरिंग, डेकोरेशन, मैरिज पैलेस, फूल व्यापारी और रिसोर्ट मालिक रडार पर आए हैं। इनके रिटर्न की जांच हाईटेक तरीके से की जा रही है। अफसरों का कहना है कि ये कारोबारी एक-एक इवेंट का लाखों रुपए चार्ज कर रहे हैं। केवल राजधानी में ही कई इवेंट का खर्च 10 करोड़ तक पहुंच चुका है। इसमें वेडिंग डेस्टिनेशन के नाम पर विदेशों में या राज्य के बाहर शादी आयोजित की जा रही हैं। मुंबई से कलाकार बुलाने में ही 15 से 50 लाख रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। कैटरिंग की एक प्लेट 8000 रुपए तक पहुंच गई है, लेकिन रिटर्न में इसकी कीमत 500 से भी आगे नहीं बढ़ रही है। इस तरह का कारोबार करने वाले पंजीकृत कारोबारी पक्का बिल देते ही नहीं हैं। नियमानुसार इन्हें 200 रुपए ज्यादा के खर्च का पक्का बिल देना है। बिल में सीजीएसटी और एसजीएसटी का भी उल्लेख करना है, लेकिन सर्विस के बाद बिल में इसकी जानकारी तक नहीं दी जा रही है। ऐसे कारोबारियों का व्यापार जितना है, उसके आधे से भी कम की जानकारी रिटर्न में दी जा रही है। फैक्ट फाइल दस्तावेजों में ही चल रहीं कंपनियां, मौके पर दफ्तर तक नहीं मिल रहे स्टेट और जीएसटी विभाग को लोहा, सीमेंट, ज्वेलरी, प्लायवुड, सेनेटरी, स्टील और ग्रॉसरी कारोबारियों के रिटर्न भी संदिग्ध मिले हैं। इस तरह का कारोबार करने वाले अपनी कंपनियों को दस्तावेजों में चला रहे हैं। फील्ड में इनका एक दफ्तर तक नहीं होता है। इन सभी कारोबारियों के रिटर्न के आधार नई जानकारियां मांगी जा रही हैं। जो जानकारी नहीं देंगे उन पर कार्रवाई तय है। विभाग के अफसरों ने बड़े संदिग्ध रिटर्न का फील्ड में जाकर भौतिक सत्यापन कर लिया है। यानी कंपनियां कागजों में तो काम कर रही हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई कारोबार नहीं हो रहा है। ऐसे कारोबारी दूसरे राज्यों के सामान की खरीदी कर वास्तविक खरीदी की राशि का मूल्यांकन कम करते हैं। इसके साथ ही विक्रय करते समय कई गुना ज्यादा कीमत लेते हैं। इसकी बीच के अंतर की राशि तकनीकी रूप से हेराफेरी करने पुराने स्टॉक और कच्चे में हिसाब रखा जाता है। ऐसे सभी जगहों पर 20 अगस्त के बाद छापामार कार्रवाई भी तय है। राज्यभर में सख्ती इसलिए टैक्स वसूली बढ़ रही छत्तीसगढ़ स्टेट जीएसटी विभाग को वित्तीय 2024-25 में जीएसटी एवं वैट से कुल 23448 करोड़ का कर राजस्व प्राप्त हुआ था। जो राज्य के कुल कर राजस्व का 38 फीसदी रहा। इस वित्तीय साल में छत्तीसगढ़ ने 18 फीसदी की जीएसटी वृद्धि दर हासिल की है जो देश में सबसे ज्यादा है। यही वजह है कि बार-बार टैक्स चोरी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने पहले ही साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में टैक्स चोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो कारोबारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है।

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