शिक्षा ही सामाजिक न्याय का मजबूत माध्यम:राष्ट्रपति बोलीं- कार्तिक उरांव का यूनिवर्सिटी का सपना साकार होगा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को गुमला के रायडीह प्रखंड स्थित मांझाटोली में आयोजित अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम सह कार्तिक जतरा-2025 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने गुमला में विश्वविद्यालय निर्माण का सपना देखा था, जिसे साकार करने के लिए पिछले 15 वर्षों से प्रयास जारी हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री आज जनजातीय समाज से हैं। यदि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर प्रयास करे तो गुमला में विश्वविद्यालय का सपना अवश्य पूरा होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सामाजिक न्याय का सबसे मजबूत माध्यम है, और इसके बिना विकास अधूरा है। उन्होंने पंखराज कार्तिक उरांव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जनजातीय चेतना और पहचान को मजबूती दी। वे हमेशा अपनी मिट्टी से जुड़े रहे और समाज को दिशा देने का काम किया। राष्ट्रपति ने कहा कि जब वे झारखंड की राज्यपाल थीं, तब टाना भगतों की जमीन की रजिस्ट्री एक-एक रुपए में कराई गई थी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के उत्थान के लिए सभी को गांवों से जुड़ना होगा। मैं अपने गांव को गोद ले रही हूं, वह मेरी मां है। आर्थिक सहयोग न सही, लेकिन मार्गदर्शन तो दे ही सकते हैं। कार्तिक उरांव की विरासत पर सियासी दांव झामुमो : विरासत के सहारे भावनात्मक जुड़ाव की कोशिश झामुमो ने भी कार्तिक उरांव को प्रमुखता दी। सिरमटोली सरना स्थल के पास फ्लाइओवर निर्माण को लेकर उठे विरोध के दौरान यह मुद्दा और उभरा। झामुमो सरकार ने विरोध शांत करने के लिए फ्लाइओवर का नाम ‘कार्तिक उरांव सेतु’ रखने की घोषणा की। इसे आदिवासी भावनाओं को सम्मान देने का प्रयास बताया गया। कांग्रेस : आदिवासी नेतृत्व का चेहरा बनाकर पेश किया कार्तिक उरांव इंजीनियरिंग की नौ डिग्रियां रखने वाले देश के चुनिंदा लोगों में शामिल थे। गुमला में जन्मे कार्तिक को कांग्रेस ने लंबे समय तक आदिवासी समाज का मार्गदर्शक चेहरा बताया। वे तीन बार सांसद और केंद्रीय मंत्री बने। आदिवासी अधिकार, शिक्षा व सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनके योगदान को कांग्रेस लगातार रेखांकित करती रही। भाजपा : विचार और मांगों को आगे बढ़ाने की रणनीति अब भाजपा भी कार्तिक उरांव की विरासत को रणनीतिक रूप से आगे बढ़ाने में जुटी है।‘कार्तिक जतरा’ का आयोजन इसी दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसमें धर्मांतरण, आरक्षण और आदिवासी पहचान जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई। साथ ही शक्ति निकेतन विश्वविद्यालय की मांग को भी केंद्र में रखा गया, जिसकी कल्पना कार्तिक उरांव ने की थी।

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