शिमला के चलौंठी में टनल निर्माण के कारण जिन घरों को खतरा पैदा हुआ है, उनकी भरपाई नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) व निर्माण में लगी कंपनी करेगा। NHAI ने इसके लिए जॉइंट बिल्डिंग सर्वे करवा दिया है। सर्वे में तीन बिल्डिंग में दरारें पाई गईं। NHAI ने स्पष्ट किया कि एक बिल्डिंग की मुआवजा राशि की घोषणा की जा चुकी है, जबकि दो अन्य भवनों की अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। यह तीनों भवन चलौंठी में टनल के मुहाने पर बने हुए हैं। इनमें दरारें आ गई है। ब्लास्टिंग में पूरी तरह रोक NHAI ने घनी आबादी वाले इलाकों में किसी भी प्रकार की ब्लास्टिंग पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि टनल निर्माण कर रही कंपनी आधी रात में ब्लास्टिंग करती है। इससे उनके घर खतरे की जद में आए है। हालांकि, कंपनी की ओर से कंट्रोल्ड ब्लास्टिंग किए जाने का दावा किया गया है। NHAI का दावा है कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिन भवनों को जोखिमपूर्ण माना गया, उन्हें पहले ही खाली करवा लिया गया है। प्रभावित परिवारों के लिए किराए पर रहने की व्यवस्था भी कर दी गई है। 3 बिल्डिंग को कराया गया था खाली बता दें कि शुक्रवार आधी रात चलौंठी में तीन बिल्डिंग में बड़ी बड़ी दरारें आईं। इससे लोगों में अफरा-तफरी मची। इसके बाद तीनों बिल्डिंग को खाली कराया गया था। इससे, 15 से ज्यादा परिवार सड़कों पर आ गए थे। एक होटल को भी खाली कराया गया। इससे टूरिस्ट को भी आधी रात में होटल से बाहर किया गया। इस घटना के बाद से क्षेत्र के लोग भी दहशत में है। क्वालिटी वर्क को लेकर उठ रहे सवाल गौरतलब है कि शिमला के भट्टाकुफर से चलौंठी तक लभग 2900 मीटर लंबी टनल का निर्माण कार्य चल रहा है। मगर टनल के क्वालिटी वर्क को लेकर बार बार सवाल उठ रहे है। शिमला में पहले भी NHAI और फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी की लापरवाही की वजह से एक बहुमंजिला मकान जमींदोज हो चुके है और कई मकानों ने दरारें आ चुकी है। भट्टाकुफर में कुछ दिन पहले ही सड़क पर 15 फीट गहरा और 15 फीट चौड़ा गड्ढ़ा बन चुका है। यहां भी कई घर खतरे की जद में है।


