शिमला में मिड-डे-मील वर्करों को मिले 12 माह का वेतन:उच्च न्यायालय का आदेश; यूनियन ने सरकार से की मांग

शिमला जिले के रामपुर के ज्यूरी में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन (सीटू) की ब्लॉक इकाई रामपुर की बैठक रविवार को आयोजित हुई। बैठक में यूनियन ने सरकार से मांग की, कि मिड डे मील कर्मियों को न्यूनतम 12,750 रुपए मासिक वेतन दिया जाए। बैठक की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष राधा ने की। कोर्ट में चुनौती देकर विरोधी रवैया अपनाया यूनियन ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया, जिसमें सिंगल बेंच (2019) और डबल बेंच (2024) ने मिड डे मील कर्मियों को 10 के बजाय 12 महीने का वेतन देने का आदेश दिया था। यूनियन ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने इन फैसलों को अब तक लागू नहीं किया है और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर मजदूर विरोधी रवैया अपनाया है। जीवन यापन करना मुश्किल बैठक को संबोधित करते हुए सीटू जिला महासचिव अमित, मिलाप नेगी और यूनियन अध्यक्ष राधा ने बताया कि प्रदेश में कार्यरत लगभग 21 हजार मिड डे मील कर्मियों की स्थिति दयनीय है। उन्हें मात्र 5 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, जो पिछले तीन महीनों से नहीं मिला है, जिससे उनका जीवन यापन मुश्किल हो गया है। रिलीवर का खर्च स्वयं उठाना पड़ रहा यूनियन ने आरोप लगाया कि कर्मियों से किचन गार्डन, सफाई और पानी की टंकी साफ करने जैसे अतिरिक्त कार्य कराए जाते हैं, जिसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता। इसके अलावा उन्हें साल में कोई छुट्टी नहीं मिलती और बीमारी या पारिवारिक कारणों से छुट्टी लेने पर रिलीवर का खर्च स्वयं उठाना पड़ता है। हड़ताल को सफल बनाने पर चर्चा यूनियन ने अपनी मांगों में न्यूनतम 12,750 रुपए वेतन, समय पर भुगतान, मुफ्त मेडिकल टेस्ट, 20 वार्षिक छुट्टियां, दो वर्दी और स्कूलों के विलय होने पर अन्य स्कूलों में समायोजन शामिल किया। इन मांगों को मनवाने और मजदूर विरोधी लेबर कोड के खिलाफ यूनियन ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में राधा देवी, जनका, तिलु देवी, गुप्ता, शिला और शांति सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

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