शिवपुरी में 15 करोड़ की सरकारी जमीन से हटा अतिक्रमण:राजस्व विभाग की टीम ने 19 मकान ढहाय, लोग बोले- दूसरी जगह जमीन नहीं दी गई

शिवपुरी जिले के करेरा कस्बे में सोमवार को बस स्टैंड के लिए स्वीकृत शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। राजस्व विभाग और नगर परिषद की संयुक्त टीम ने जेसीबी की मदद से 19 कच्चे-पक्के मकान और झोपड़ियां ढहा दीं। इस कार्रवाई में लगभग 65 हजार वर्ग फीट जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई, जिसकी अनुमानित कीमत 15 करोड़ रुपये है। मौके पर तनावपूर्ण महौल बना रहा
अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। लोगों ने टीम का विरोध किया। एक व्यक्ति अपने मकान को बचाने के लिए जेसीबी के सामने लेट गया, जिसे पुलिस ने हटाया। इस दौरान यहां रहे रहे कई परिवारों की महिलाओं और बच्चों की आंखों में आंसू देखे गए, जिससे मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। मकान ढहने के बाद पीड़ित परिवारों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपना सामान निकालने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कुछ मामलों में भेदभाव का आरोप भी लगाया गया। मानकुंवर नामक महिला ने बताया कि वह तीन साल पहले गांव से आकर यहां बसी थी। उनके पति की दो महीने पहले सड़क हादसे में मौत हो गई थी। अब घर टूटने के बाद उनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं बचा है और उनका सारा सामान बाहर पड़ा है। माया ने आरोप लगाया कि उनका दो मंजिला मकान जेसीबी से ढहा दिया गया, जबकि पास में बने पड़ोसी के मकान को छोड़ दिया गया। रानी जाटव ने बताया कि विरोध करने पर उनके बेटे को धक्का दिया गया और पति को मलबे में दबाने की धमकी दी गई। भुवन लोधी ने आरोप लगाया कि उन्हें घर से सामान निकालने का मौका नहीं मिला। रहवासियों ने करेरा विधायक रमेश खटीक पर भी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि पूर्व में विधायक ने आश्वासन दिया था कि यदि उन्हें हटाया गया तो दूसरी जगह जमीन दी जाएगी। हालांकि, कार्रवाई के दिन उनसे फोन पर संपर्क नहीं हो सका।

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