अलवर शहर के दिवाकरी मोड पर राधाकृष्ण मंदिर में 9 दिवसीय शिवमहापुराण कथा शुरू हो गई। चित्रकूट धाम से पधारे कथा वाचक स्वामी कमलदास ने पहले दिन शिवमहापुराण कथा का महात्म्य की कथा सुनाई। कथा के पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। आत्मा न तो जन्म लेती है, और न मरती है। जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु भी होती है। आत्मा शरीर की तरह कभी वृद्ध नहीं होती है। शरीर के परिवर्तनों का आत्मा पर कोई प्रभाव नहीं होता है। शरीर की वृद्धि आत्मा की उपस्थिति के कारण होती है। किन्तु आत्मा की न तो कोई उपवृद्धि है और न ही उसमें कोई परिवर्तन होता है। अतः आत्मा शरीर के छः प्रकार के परिवर्तनों से मुक्त है। आत्मा ज्ञान से या चेतना से सदैव पूर्ण है। अतः चेतना ही आत्मा का लक्षण है।


