शिवराज बोले- बीजों की वैरायटी पहुंचाने ‘बीज ग्राम’ बनाएंगे:सीहोर में किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन; अन्य राज्यों के मंत्री पहुंचे

सीहोर के अमलाहा में दलहन उत्पादन और उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं बात करने शनिवार को राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया है। इसमें विचार-विमर्श चल रहा है। दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। इस कार्यक्रम में सीएम डॉ मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहुंचे हैं। एमपी समेत प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं किस्मों के प्रदर्शन हेतु खेतों का भ्रमण तथा किसानों से संवाद किया। उन्होंने ‘बीज ग्राम’ बनाने की घोषणा की। चौहान ने कहा गांवों में सुगमता से बीजों की वैरायटी पहुंच सके, इसके लिए बीज ग्राम बनाएंगे। आज सीहोर जिले के अमलाहा की पवित्र धरा पर देश के विभिन्न राज्यों से पधारे कृषि मंत्री , मुख्यमंत्री , केंद्रीय राज्य मंत्री, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एक साथ जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए दालों में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य पर गंभीर मंथन हो रहा है। अतिथियों द्वारा प्रशासनिक भवन, किसान प्रशिक्षण केंद्र और प्लांट जीनोमिक्स, प्लांट टिश्यू कल्चर, प्लांट ब्रीडिंग एवं प्लांट पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं सहित विभिन्न अधोसंरचनाओं का लोकार्पण किया गया। उन्होंने दलहन के उन्नत बीज, उत्पाद एवं तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। सम्मेलन में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन का परिचय दिया गया, आईसीएआरडीए के कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया गया और नई तकनीकों के उपयोग पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। पल्सेस मिशन पोर्टल का भी लोकार्पण किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा उत्कृष्ट 5 किसानों को सम्मानित किया जाएगा और उन्नत बीजों का वितरण भी किया जाएगा। ऑडिटोरियम में आयोजित तकनीकी सत्र में प्रगतिशील किसानों, एफपीओ प्रतिनिधियों, बीज उत्पादकों, पल्सेस मिलर एसोसिएशन और वैल्यू एडिशन विशेषज्ञों द्वारा विचार रखे जा रहे हैं। उन्नत किस्मों को किसानों तक पहुंचाने की रणनीति, दलहनी फसलों में रोग प्रबंधन, एमएसपी पर समय पर उपार्जन, बीज उत्पादन संवर्धन, यंत्रीकरण प्रोत्साहन और अनुसंधान संस्थाओं के योगदान जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा जारी है।

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