भास्कर न्यूज| महासमुंद नगर के स्थानीय इमली भाठा में आयोजित शिव महापुराण कथा के चौथे दिन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। कथावाचक पं. कमलेश प्रसाद दुबे ने शिव-पार्वती विवाह के अलौकिक प्रसंग का वर्णन किया। संगीत की मधुर लहरियों और पारंपरिक मंगल गीतों के बीच जब विवाह की रस्में शुरू हुईं, तो पूरा पंडाल हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। कथा वाचक ने बताया कि शिव-शक्ति का विवाह असल में जीव और ब्रह्म का मिलन है। उन्होंने कथा के दौरान एक बहुत ही सुंदर प्रसंग सुनाया । विवाह की रस्म के दौरान माता पार्वती के पिता ने भगवान शिव से उनके कुल और वंश के बारे में पूछा, तो शिव मौन रहे। शिव के मौन रहने पर जब सभा में संशय बढ़ा, तब देवर्षि नारद ने अपनी वीणा की तान छेड़कर शिव के स्वरूप को स्पष्ट किया। पं. दुबे ने बताया कि भगवान शिव स्वयंभू हैं, उन्होंने स्वयं की रचना की है। उनके न माता हैं, न पिता और न ही कोई कुल-गोत्र। वे समस्त अस्तित्व से परे एक योगी हैं, जिनका एकमात्र वंश ध्वनि है। जब सृष्टि अस्तित्व में आई, तो पहली अभिव्यक्ति ध्वनि के रूप में हुई और शिव वही आदि ध्वनि हैं। देवता, दानव और भूत-पिशाच सभी बने बाराती: व्यास पीठ ने कहा कि यह दुनिया की सबसे अनोखी शादी थी। इसमें जहां एक ओर राजसी ठाट-बाट वाले देवता शामिल थे, वहीं दूसरी ओर असुरों ने भी अपने आपसी बैर भुलाकर शिरकत की। कथा के दौरान शिव मेरी मंदिर, शिव मेरी पूजा जैसे भक्तिमय भजनों पर श्रद्धालु झूमने को मजबूर हो गए। महिलाओं ने मंगल गान गाकर शिव-गौरी का अभिनंदन किया। पं. दुबे ने जोर देते हुए कहा कि शिव महापुराण का श्रवण करने से मनुष्य के समस्त दैहिक और भौतिक ताप नष्ट हो जाते हैं। कार्यक्रम का समापन भगवान शिव और भारत माता की महाआरती के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।


