सिटी रिपोर्टर| बिलासपुर झूठ का दंड कितना भयावह हो सकता है, इसका प्रभाव कलियुग तक कैसे बना रहता है, इसका सजीव वर्णन पत्रकार कॉलोनी में चल रही शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सुनने को मिला। कथा वाचिका ईश्वरी देवी ने बताया कि ब्रह्माजी को झूठ बोलने पर जो अभिशाप मिला, वह इतना प्रचंड था कि आज भी उसके प्रभाव देखे जा सकते हैं। इसी कारण ब्रह्मा के केवल एक ही मंदिर पुष्कर में हैं और केतकी पुष्प भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता। कथा वाचिका ने कहा कि शिव महापुराण के अनुसार एक बार ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हो गया कि सृष्टि में कौन श्रेष्ठ है। ब्रह्माजी ने स्वयं को सृष्टिकर्ता बताकर श्रेष्ठ माना, जबकि भगवान विष्णु ने स्वयं को पालनहार बताते हुए सर्वोच्च होने का दावा किया। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच भयंकर युद्ध होने लगा। देवताओं के इस संघर्ष को रोकने भगवान शिव अग्नि स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) के रूप में प्रकट हुए। शिव ने दोनों से कहा कि जो इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत खोज लेगा, वही सर्वश्रेष्ठ कहलाएगा। भगवान विष्णु ने वाराह अवतार धारण कर पाताल लोक में ज्योतिर्लिंग का अंत खोजने का प्रयास किया, जबकि ब्रह्माजी हंस का रूप धारण कर आकाश की ओर बढ़े। काफी प्रयास के बाद भी जब दोनों को ज्योतिर्लिंग का आदि-अंत नहीं मिला, तब भगवान विष्णु ने सत्य स्वीकार कर लिया कि वे असफल रहे। वहीं ब्रह्माजी ने विजय पाने केतकी पुष्प को साक्षी बनाकर झूठ बोल दिया कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत देख लिया है। सर्वज्ञ भगवान शिव से यह असत्य छिप न सका। शिव के पूछने पर केतकी पुष्प ने भी झूठ का साथ दिया। इस पर भगवान शिव ने कहा कि जो देवता झूठ बोलता है, वह पूजनीय नहीं हो सकता। इसके बाद शिव ने अपने काल भैरव अवतार को प्रकट किया और ब्रह्माजी के पांचवें सिर का छेदन कर दिया।


