शिव महापुराण कथा में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम:रामप्रसाद महाराज ने शिव महापुराण के गूढ़ रहस्यों और मानव जीवन के उद्धारक सूत्र बताए

श्री तिजारती चैम्बर सर्राफन गोशाला, ब्यावर के तत्वावधान में गोमाता की सेवार्थ शिव महापुराण कथा एवं हार्टफुलनेस ध्यानोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। दूसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। रामद्वारा बदौतरा के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा व्यास रामप्रसाद महाराज ने खचाखच भरे पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को शिव महापुराण के गूढ़ रहस्यों और मानव जीवन के उद्धारक सूत्रों पर विस्तार से प्रकाश डाला। गोशाला प्रशासक एवं तहसीलदार हनुतसिंह ने बताया कि महाराज ने समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया था। महाराज ने यह भी बताया कि गोमाता 33 करोड़ देवताओं का एकमात्र मंदिर है। उनके अनुसार, गोशाला में श्रवण की गई कथा 101 तीर्थों के दर्शन के समान पुण्य प्रदान करती है। कथा के दौरान महाराज ने अहंकार त्यागकर संवाद का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने ब्रह्मा और विष्णु के ‘कौन बड़ा’ के विवाद से शिवलिंग के प्राकट्य की कथा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सत्य के पालन से भगवान विष्णु की घर-घर पूजा हुई, जबकि असत्य के कारण ब्रह्मा को पृथ्वी लोक में केवल एक ही मंदिर—पुष्कर तीर्थ—प्राप्त हुआ। उन्होंने शिवलिंग को साक्षात ज्योति स्वरूप बताया और महा मृत्युंजय मंत्र के पाठ से स्वास्थ्य सिद्धि की प्राप्ति का महत्व भी समझाया। इस अवसर पर सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत कथा स्थल पर पहुंचे और महाराज का आशीर्वाद लिया। अविनाश गहलोत फाउंडेशन की ओर से उन्होंने गोशाला एवं नंदी शाला हेतु 1,01,000 की सहयोग राशि भेंट की। महाआरती से पूर्व भगवती प्रसाद अग्रवाल, कमलकिशोर गर्ग, लक्ष्मीनारायण बलदुआ, सतीश गर्ग, सुरेश यादव सहित माहेश्वरी पंचायत, गीता भवन एवं माहेश्वरी महिला परिषद की वीणा बलदुआ, कुसुम मालू, मीना हरकुट, अनिशा, मंजू नोगजा, रेखा भूतड़ा, रश्मि सोमानी एवं प्रेम लोहिया ने व्यासपीठ से आशीर्वाद ग्रहण किया। दोपहर 1 बजे आयोजित हार्टफुलनेस ध्यानोत्सव में सुधीर शर्मा, मनोज शर्मा एवं सपना सोनी ने शांत वातावरण में ध्यान क्रिया करवाई। सपना सोनी ने ध्यान को ‘मैं से हम’ बनने का मार्ग बताते हुए उपस्थित भक्तजनों को आत्मचिंतन की प्रेरणा ⁷दी। उन्होंने कहा कि ईश्वर की दिव्य सत्ता का प्रकाश हमारे हृदय में पहले से विद्यमान है, जिसे ध्यान द्वारा अनुभव किया जा सकता है।कथा आयोजन में राकेश यादव, मनीष गुप्ता, कृष्णकांत सिंगल, अनुज खंडेलवाल, माणक डाणी, एच.के. आनंदानी, अजय हेड़ा सहित अनेक भक्तजनों ने व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।कथा से पूर्व प्रतिदिन दोपहर 1 से 1:45 बजे तक हार्टफुलनेस ध्यान क्रिया आयोजित की जा रही है।

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