भास्कर न्यूज| जांजगीर पापमोचनी एकादशी श्रवण नक्षत्र और शिव योग में 25 मार्च को मनाई जाएगी। यायीजय योग और द्विपुष्कर योग होने से इस एकादशी का महत्व कई गुणा अधिक हो गया है। एकादशी व्रत 24 की रात 12.17 बजे से शुरू होकर 25 मार्च की रात 11.30 बजे तक है। पारण 26 मार्च को सूर्योदय के बाद किया जा सकेगा। पंडित कान्हा तिवारी ने बताया कि एकादशी का व्रत करने से सुख-समृद्धि आती है। एकादशी व्रत का उद्देश्य मन और शारीरिक इंद्रियों पर नियंत्रण प्राप्त कर अध्यात्म की ओर जाना है। इस दिन भगवान श्री नारायण के साथ माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि एकादशी के दिन व्रत रखें, लक्ष्मी नारायण को पंचामृत से स्नान कर कर विधिवत उनकी पूजा करें। पूजा के बाद उन्हें भोग लगाएं साथ ही तुलसी दल भी रखें। इस दिन माता तुलसी को घी का दीपक दिखाएं। इस दिन भगवान विष्णु को अनाज चढ़ाकर गरीबों में बाटें। जरूरतमंदों को करें दान पं. तिवारी ने बताया कि चैत्र माह नव संवत में पड़ने से पापमोचनी एकादशी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। यह एकादशी सभी पापों का नाश करती है और सुख-समृद्धि लाती है। एकादशी का महत्व पापमोचनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप की पूजा का विधान है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। एकादशी के दिन दान करना विशेष फलदायी है। ब्राह्मणों, जरूरतमंदों और गरीबों के बीच दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से अन्न, वस्त्र और धन का दान अत्यंत फलदायी माना गया है।


