भास्कर न्यूज | सरायकेला सावन के पावन महीने की पहली सोमवारी को लेकर शिव भक्तों में खासा उल्लास है। इस दिवस पर शिव भक्त उपवास व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ की आराधना, पूजा-अर्चना, जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने की तैयारी पूरी कर चुके हैं। इसे लेकर सरायकेला सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों के शिव मंदिर भी सोमवार की विशेष पूजा-अर्चना को लेकर तैयार कर लिए गए हैं, जिसमें सरायकेला नगर क्षेत्र अंतर्गत आस्था के प्रतीक क्षेत्र प्रसिद्ध बाबा बुद्धेश्वर शिव मंदिर कुदरसाई, माजना घाट स्थित बाबा सिद्धेश्वर पंचमुखी महादेव मंदिर, डेली मार्केट स्थित प्राचीन शिवालय व गेस्ट हाउस स्थित प्रसिद्ध बाबा महादेव शिव मंदिर सहित भुरकुली ग्राम स्थित बाबा विश्वनाथ महादेव शिव मंदिर, मानिक बाजार गांव स्थित बाबा महाकालेश्वर शिव मंदिर, विजयतरण गांव स्थित प्राचीन शिवालय व सीनी रेलवे कॉलोनी और बाजार स्थित शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की तैयारी की गई है। इसे लेकर सरायकेला में फल व प्रसाद के लिए श्रावण बाजार विशेष रूप से सजा हुआ है। सरायकेला के कुदरसाई स्थित बाबा बुद्धेश्वर शिव मंदिर प्राचीन समय से शिव भक्तों के आस्था का केंद्र रहा है। लोग जिले सहित अन्य जिलों और राज्यों से भी बाबा बुद्धेश्वर महादेव की पूजा करने यहां पहुंचते हैं। मान्यता रही है कि बाबा बुद्धेश्वर महादेव के दरबार में सच्चे मन से लगाई गई अर्जी से शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बाबा बुद्धेश्वर महादेव के प्राचीन इतिहास के संबंध में बताया जाता है कि जिस समय सर्वप्रथम सरायकेला स्टेट की स्थापना हुई थी, उस समय राजमहल की स्थापना कुदरसाई में हुई थी। जिसकी परंपरा अनुसार राजमहल प्रांगण में बाबा बुद्धेश्वर महादेव मंदिर स्थापित की गई थी। परंतु खरकाई नदी में उस समय आये भीषण बाढ़ में समूचा राजमहल ध्वस्त हो गया। स्वयंभू महादेव की श्रृंखला में भुरकुली गांव स्थित बाबा विश्वनाथ महादेव मंदिर भक्तों के आस्था का केंद्र रहा है। जहां प्रत्येक वर्ष चड़क संक्रांति के अवसर पर भव्य चड़क पूजा का आयोजन किया जाता है। और श्रावण महीने में बाबा विश्वनाथ महादेव के विशेष पूजन की परंपरा रही है। आज भी समस्त ग्राम वासियों का प्रत्येक दिन बाबा विश्वनाथ महादेव के दर्शन के पश्चात ही प्रारंभ होता है। मान्यता रही है कि बाबा विश्वनाथ महादेव के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बताया जाता है कि दो भाइयों द्वारा लिए गए खेत में खेती करने के क्रम में खेत से स्वयंभू बाबा विश्वनाथ प्रकट हुए थे। जिसके बाद भक्तों द्वारा उनके मंदिर निर्माण का कार्य किया गया। माजनाघाट शिव मंदिर। कुदरसाई शिव मंदिर।


