रोटी बैंक, हम उस बैंक की बात कह रहे हैं जो छोटा-छोटा कलेक्शन करके उसी दिन शहर में लोगों की जरूरत को पूरा करने का काम कर रही है। यानि ऐसी संस्था जो शहर के करीब 700 घरों से हर रोज 2-2 रोटी का कलेक्शन करती है और फिर उसी दिन करीब 250 जरूरतमंद गरीबों का पेट भर रही है। इस काम के लिए अब शहर में 8 कलेक्शन सेंटर काम कर रहे हैं। इस मुहिम की शुरुआत जय श्री बांके सेवा समिति के सदस्यों ने 4 साल पहले कोरोना काल की स्थिति से प्रेरणा लेकर की। सबसे पहले समिति के संस्थापक अध्यक्ष जय प्रकाश गोयनका ने मीटिंग कर सदस्यों से खुद के घर व आस पड़ोस से 2-2 रोटी का कलेक्शन आरएसएस के पैटर्न से शुरू किया। जिसकी कोई घर मना नहीं करता है और ये ही 2-2 रोटी जरूरतमंद की भूख मिटाने के लिए वरदान साबित होती है। रोटी के साथ दाल या कोई भी सब्जी दी जाती है, जिसे पहले संस्था अध्यक्ष गोयनका खुद बनाते थे, लेकिन अब श्रीमद भागवत कथा, सुंदरकांड का पाठ की भेंट पूजा की प्राप्त राशि से सब्जी हलवाई से बनवाकर लेकर आते हैं। इस कार्य में भामाशाह भी शामिल है, जो सब्जी एवं तेल आदि की व्यवस्था करते हैं। अबतक 4 साल में करीब 3.50 लाख लोगों की भूख मिटा चुके हैं और सर्दी, गर्मी व बरसात हर स्थिति में रोटी कलेक्शन व वितरण का कार्य अनवरत रूप से जारी रखा जाता है। संस्थापक अध्यक्ष जयप्रकाश गोयनका का कहना है कि हमारा उद्देश्य है कि हर घर इस मुहिम से जुड़े, जिससे कोई भूखा नहीं रहे। कोरोना काल में पांच मजदूरों को खाना खिलाने से शुरू हुई श्रीजी रोटी बैंक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जयप्रकाश गोयनका बताते हैं कि संस्था कार्यकर्ता कोरोना काल में सेवा कार्यों में जुटी थी। एक रात सूरत से मुरैना लौट रहे श्रमिकों के 20 सदस्यीय दल को पानी पिलाया और दवाइयां दीं तो उन्होंने बताया कि दो दिन से खाना नहीं खाया है। तत्काल पांच कार्यकर्ताओं के घरों से भोजन मंगाकर मजदूरों को खिलाया। बाद में लगा कि यह स्थिति तो शहर में भी है। तभी आरएसएस की तरह घरों से भोजन पैकेट एकत्रित करना तय किया। रोहित अरोड़ा के विशेष सहयोग से कलेक्शन के साथ-साथ वितरण गर्मी में 11 बजे और सर्दी में सुबह 11.30 बजे से रोटी खत्म होने तक अध्यक्ष जयप्रकाश गोयनका, महामंत्री हरि गोविंद मिश्रा, कोषाध्यक्ष गोपाल गर्ग, कार्यकारिणी सदस्य घनश्याम सिंह, महेश शर्मा, मुरारी अग्रवाल करते हैं।


