श्रीबालाजी-अलाय पंचायत समिति मुख्यालय का पेंच:अलाय के ग्रामीणों ने क़स्बा बंद रख जिला कलेक्ट्रेट में किया विरोध प्रदर्शन; सरकार को चेतावनी मांगें नहीं मानी तो और उग्र होगा आंदोलन

नागौर जिले में श्रीबालाजी-अलाय नई पंचायत समिति के गठन की घोषणा के साथ ही अब मुख्यालय के स्थान को लेकर सियासत और क्षेत्रीय संघर्ष तेज हो गया है। अलाय और श्रीबालाजी के बीच उपजा यह विवाद अब सड़कों पर उतर आया है, जहां दोनों ही पक्ष अपने-अपने क्षेत्र को प्रशासनिक केंद्र बनाने की मांग पर अड़े हुए हैं। ​अलाय में बंद और प्रदर्शन: मुख्यालय के लिए लामबंदी ​अलाय को पंचायत समिति मुख्यालय बनाने की मांग को लेकर 17 दिसंबर से शुरू हुआ आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। इसी क्रम में अलाय कस्बे के व्यापारियों ने अपने सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूर्णतः बंद रखकर विरोध जताया और नागौर कलेक्ट्रेट पर विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बताया कि भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से अलाय सबसे उपयुक्त स्थान है। ग्रामीणों का तर्क है कि अलाय से आसपास के गांवों के लिए सार्वजनिक परिवहन की बेहतर कनेक्टिविटी है, जिससे आमजन को सरकारी कार्यों के लिए सुविधा होगी। व्यापारियों और ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। ​श्रीबालाजी में भारी रोष: शुद्धिकरण आदेश का विरोध ​दूसरी ओर, श्रीबालाजी क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विवाद की मुख्य जड़ सरकार द्वारा जारी वह ‘शुद्धिकरण आदेश’ है, जिसके तहत पहले घोषित ‘एकल श्रीबालाजी पंचायत समिति’ को बदलकर अब ‘श्रीबालाजी-अलाय संयुक्त पंचायत समिति’ कर दिया गया है। श्रीबालाजी के ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने पहले केवल श्रीबालाजी के नाम की घोषणा की थी, लेकिन अब राजनीतिक दबाव में इसमें बदलाव किया गया है जो उन्हें स्वीकार्य नहीं है। पिछले दिनों श्रीबालाजी के लोगों ने भी जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि मुख्यालय केवल श्रीबालाजी में ही रखा जाए। ​धर्मसंकट में प्रशासन: बढ़ रहा है राजनीतिक दबाव ​मुख्यालय की इस जंग ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को धर्मसंकट में डाल दिया है। एक तरफ अलाय अपनी भौगोलिक स्थिति और परिवहन सुविधाओं का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ श्रीबालाजी अपने पुराने हक और मूल घोषणा को आधार बना रहा है। दोनों ही कस्बों के लोग लामबंद होकर एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक दबाव बनाने में जुटे हैं। इस खींचतान के कारण क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और व्यापारियों व ग्रामीणों के तेवरों से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है। अब देखना यह है कि पंचायती राज विभाग और सरकार इस गुत्थी को कैसे सुलझाते हैं।

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