श्रीमद्भागवत कथा सुनने मात्र से जीव जन्म व मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है: रविंद्र कृष्ण शास्त्री

भास्कर न्यूज | गिरिडीह शहर के अरगाघाट सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा की शुरुआत कलश यात्रा के साथ सोमवार से की गई। मंदिर परिसर से बैंडबाजों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जो अरगाघाट उसरी नदी तट पर पहुंची। जहां आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश में जल भरवाया। जय श्री राम, हर हर महादेव, जय गणेश जैसे नारे लगाते हुए कलश यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। जहां आचार्य रवींद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने भागवत की पूजा की और पूजन के बाद कलश की स्थापना की गई। संध्या में पहले दिन का कथा प्रस्तुत करते हुए रविंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने से मानव जीवन में एक जन्म नहीं, अपितु कई जन्मों के पापों का नाश होने के साथ ही हमारे शुभ कर्मों का उदय होता है। कथा सुनने मात्र से जीव जन्म और मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है। नारद जी ने भक्ति देवी के कष्ट की निवृत्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा का साप्ताहिक अनुष्ठान किया था। जहां संत कुमारों ने भागवत का प्रवचन करते हुए नारद के मन का संशय दूर किया। इसी कथा को धुंधकारी प्रेत ने अपने अग्रज से श्रवण किया और प्रेत योनि से मुक्ति पाकर विष्णु लोक को प्राप्त हुए। भगवत कथा श्रवण से जीव के सभी पाप कर्म मिट जाते हैं। अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया मुख्य यजमान गोपाल स्वर्णकार ने कहा कि प्रतिदिन संध्या 6 बजे से कथा प्रारम्भ किया जाता है, जो देर रात तक जारी रहता है। आप सभी धर्म प्रेमी कथा का आनंद लेने के लिए सादर आमंत्रित हैं।भागवत की महिमा के बारे मे बताया जायेगा। इत्यादि गणमान्य लोग उपस्थित थे।इस दौरान आयोजन समिति के कृष्ण कुमार सिन्हा, ललित सिन्हा, भूपेन्द्र ओझा, प्रभात कुमार, विष्णु यादव, आशीष अंबस्ता, संतोष यादव, दीपक साव, आदित्य यादव, पीकू यादव, छोटू यादव, लोकनाथ सहाय, नवीन सिन्हा, संदीप सिन्हा, अमरनाथ सिंह, विजय सिंह, नीलम झा, पुष्पा सिन्हा, नीलम वर्मा, पिंकी, सोनी, राशि, साक्षी सहित अनेक लोग मौजूद थे।

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