अमृतसर में ‘वारिस पंजाब दे’ जत्थेबंदी की लीडरशिप और सात सदस्यीय पीएससी कमेटी ने श्री अकाल तख्त साहिब में अरदास की। इस अवसर पर भाई अमृतपाल सिंह के पिता बापू तरसेम सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि यह अरदास कौम की उन्नति और भविष्य के कार्यों की सफलता के लिए की गई है। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए तरसेम सिंह ने दूसरी ‘खालसा वहीर’ की घोषणा की। यह वहीर 25 फरवरी से शुरू होगी, जो श्री अकाल तख्त साहिब (अमृतसर) से चलकर श्री दमदमा साहिब (तलवंडी साबो) तक जाएगी। इस वहीर का मुख्य उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर निकालना और उन्हें धर्म से जोड़ना है। तरसेम सिंह ने संगत से इस मुहिम में बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की। अकेले चुनाव लड़ने का प्रयास : तरसेम राजनीतिक गठबंधन की अटकलों पर विराम लगाते हुए तरसेम सिंह ने स्पष्ट किया कि शिरोमणि अकाली दल (बादल) के साथ किसी भी कीमत पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि बेअदबी की घटनाओं और पंथ की वर्तमान स्थिति के लिए बादल परिवार की स्वार्थपूर्ण राजनीति जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि ‘वारिस पंजाब दे’ अपनी पार्टी को मजबूत कर रहा है और अकेले चुनाव लड़ने का प्रयास करेगा। हालांकि, पंथक एकता के लिए समान विचारधारा वाले अन्य दलों के साथ गठबंधन पर विचार किया जा सकता है। अमृतपाल का लोकसभा सत्र में शामिल न होना लोकतंत्र का अपमान : तरसेम सिंह तरसेम सिंह ने केंद्र और राज्य सरकार पर भी तीखे प्रहार किए। उन्होंने भाई अमृतपाल सिंह को संसद सत्र में शामिल न होने देने को लोकतंत्र का अपमान बताया। उनके अनुसार, जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि को अपनी बात रखने से रोकना सरकार की तानाशाही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार दिल्ली के इशारों पर काम कर रही है, जिससे पंजाब के पानी और अन्य अधिकारों का हनन हो रहा है। धार्मिक मामलों में दखल 328 पावन स्वरूपों के मामले में SIT द्वारा 40 लोगों को समन किए जाने पर उन्होंने दुख जताया। उन्होंने कहा कि यदि हमारी पंथक संस्थाओं (SGPC) ने समय पर जिम्मेदारी निभाई होती, तो आज सरकारों को हमारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने का मौका न मिलता।


