भास्कर संवाददाता | पाली शहर के अणुव्रत नगर में भैरव पुराण महाकथा और महालक्ष्मी महायज्ञ महामहोत्सव का श्रीगणेश शनिवार को हुआ। ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच कृष्णगिरि पीठाधीश्वर जगदुरु वसंत विजयानंद गिरि के सान्निध्य में अनुष्ठान 1 फ़रवरी तक चलेगा। शनिवार को पौराणिक सिद्ध परंपरा और विधान के साथ महायज्ञ शुरू हुआ। पाली में यह अनूठा, अद्भुत, अद्वितीय धर्म महोत्सव है। पहले दिन सैकड़ों श्रद्धालु साधना-पूजा और कथा श्रवण के लिए पहुंचे। शनिवार सुबह शुभारंभ के प्रथम सत्र में साधना की। इसमें महिलाओं की संख्या विशेष थी। सुबह से ही साधना शिविर स्थल के बाहर श्रद्धालुओं की कतारें लगना शुरू हो गई थी। जैसे ही ढोल नगाड़ों के साथ जगद्गुरु देव का आगमन हुआ। महोत्सव परिसर गुरुदेव की जयजयकार से गूंज उठा। गुरुदेव वसंत विजयानंद गिरी महाराज द्वारा साधना स्थल पर विराजित देवी देवताओं की विधान के साथ पूजा अर्चना की। इसके बाद साधना में उपस्थित श्रद्धालुओं को साधना के रहस्यों के बारे में बताया। आज भी होंगे यज्ञ और कथा सुबह 11 बजे से जगद्गुरू देव की निश्रा में हर दिन साधना होगी। गुरुदेव द्वारा साधकों को मंत्रों का महत्व, पद्धति के बारे में विशेष जानकारियां भी दी जाएगी। साधना में समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, पायरेट यंत्र सिद्ध करवाए जाएंगे। दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक सुख शांति समृद्धि के लिए महालक्ष्मी महायज्ञ विशेष विधान के अनुसार होगा। रात्रि 8 बजे से भैरव महापुराण कथा का जगद्गुरु वसन्त विजयानंद गिरी महाराज के श्रीमुख से रसास्वादन श्रद्धालू करेंगे। कथा संगीतमयी होगी। कथा के मध्य गुरुदेव द्वारा श्रद्धालुओं को कई दुर्लभ चमत्कारी उपाय बताए जाएंगे। श्री महालक्ष्मी महायज्ञ दिव्य यज्ञ कुटीर में गुरुदेव के सानिध्य में भगवान गणेश, मां महालक्ष्मी, मां पद्मावती, भैरव जी, शिवजी, हनुमानजी सहित देवी देवताओं की पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने जीबू कॉइन, माला, आसन के साथ बैठे श्रद्धालुओं को मंत्र और इसकी शक्ति की जानकारी देते हुए महिमा बताई। मंत्रोच्चार के साथ ढ़ाई घंटे तक श्रद्धालुओं-साधकों को साधना करवाई। समृद्धि, खुशहाली, शांति को आकर्षित करने के लिए यह दुर्लभ साधना प्रतिदिन होगी। कई श्रद्धालुओं के हाथों में समृद्धि को आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन, पायरेट लक्ष्मी यंत्र थे, जिन्हें सिद्ध करने की प्रक्रिया आरंभ की। गुरुदेव द्वारा उच्चारित मंत्रों का महत्व बताया। श्रद्धालुओं को कष्ट निवारक चमत्कारी उपाय गुरुदेव ने बताए। 9 कुंड के महायज्ञ में सिद्ध होंगे 1008 समृद्धि कलश: मां पद्मावती धाम कृष्णगिरी के अध्यक्ष शंकेश जैन ने बताया कि महालक्ष्मी यज्ञ पूजा विधान की शुरुआत गणेश आराधना से हुई।


