रांची | श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में 9 जनवरी से 12 जनवरी रविवार तक चार दिवसीय श्रीविष्णु सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान का आयोजन किया गया है। यह सहस्त्रनामार्चन श्रीवैकुंठ एकादशी महोत्सव पर वर्ष में एक बार सामूहिक रूप से कराया जाता है। वैकुंठ एकादशी महोत्सव धनुर्मास के दौरान शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है। यह माना जाता है कि वैकुंठ लोक का द्वारा इसी दिन खुलता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति वैकुंठ एकादशी के दिन व्रत धारण कर वैकुंठ द्वार से प्रवेश कर भगवान श्रीमन्नारायण के जगमोहन में प्रवेश करेगा, निश्चित रूप से उसे आध्यात्मिक अधिष्ठान की प्राप्ति होगी और मरणोपरांत यमराज का सामना किए बिना ही भगवान के धाम को प्राप्त हो जाएगा। इसलिए श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर मंदिर में वर्ष में एक बार केवल इस दिन वैकुंठ द्वार को खोला जाता है और भक्तगण भगवान के 1008 नाम मंत्र से (सहस्त्रनाम) अर्चना कराते हैं। कहा जाता है कि यह वैकुंठ द्वार सिद्ध जनों के लिए बाहरी आकाशगंगा के लिए भी सूक्ष्म प्रवेश मार्ग है। इस वैकुंठ महोत्सव पर भक्तों की भारी भीड़ होती है। चार दिनी सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान में काफी संख्या में भक्त लोग कूपन प्राप्त कर शामिल होते हैं।


