श्री-सीमेंट प्रोजेक्ट पर विवाद, कंपनी ने विरोध को बताया भ्रम:विधायक ने की जनसुनवाई रद्द करने की मांग, किसानों ने बताया खतरा

खैरागढ़ के छुईखदान-संडी इलाके में प्रस्तावित श्री सीमेंट कंपनी के 404 हेक्टेयर खनन और औद्योगिक प्रोजेक्ट को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। कंपनी इस परियोजना को क्षेत्र के विकास, रोजगार और सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं में सुधार का अवसर बता रही है। हालांकि, स्थानीय किसानों को अपनी उपजाऊ जमीन, जलस्तर, पर्यावरण और आजीविका पर गंभीर खतरा दिखाई दे रहा है। पीढ़ियों से खेती पर निर्भर ग्रामीण मानते हैं कि प्लांट लगने से उनकी जमीन बंजर हो जाएगी, प्रदूषण बढ़ेगा और उनका जीवन बुरी तरह प्रभावित होगा। इस बढ़ते विरोध के बीच, श्री सीमेंट कंपनी ने खैरागढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपना पक्ष रखा। कंपनी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग गलत जानकारी फैलाकर ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं और अनावश्यक आंदोलन खड़ा कर रहे हैं। गांव को विस्थापित नहीं करने का दावा कंपनी ने दावा किया कि किसी भी गांव को विस्थापित नहीं किया जाएगा और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचने दिया जाएगा। इसके बजाय, स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास का लाभ मिलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद खैरागढ़ कलेक्टर इंद्रजीत चंद्रवाल ने भी कहा कि लोगों के मन में कई भ्रम हैं, जिन्हें संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। कलेक्टर के अनुसार, जनसुनवाई ग्रामीणों के लिए अपनी आपत्तियां और सवाल सीधे रखने का एक वैधानिक मंच है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रशासन स्थिति स्पष्ट करने के लिए अलग से बातचीत के लिए तैयार है। विधायक ने की जनसुनवाई रद्द करने की मांग वहीं, क्षेत्र की विधायक यशोदा वर्मा इस परियोजना का पुरजोर विरोध कर रही हैं। उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर 11 दिसंबर को होने वाली जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने की मांग की है। विधायक का कहना है कि किसानों की उपजाऊ जमीन पर भारी औद्योगिक प्रोजेक्ट लागू करना उचित नहीं है और यदि जनसुनवाई नहीं रोकी गई तो एक बड़ा आंदोलन होगा। किसानों का तर्क है कि कंपनी की रिपोर्ट में केवल 138 लोगों के रोजगार का जिक्र है, जो हजारों ग्रामीणों की जमीन और भविष्य के मुकाबले ना के बराबर है।

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