भास्कर न्यूज | जालंधर संकष्टी चतुर्थी इस बार 10 सितंबर को है। व्रत रखकर पूजा-पाठ करने से अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार इससे धन और समृद्धि में भी वृद्धि होती है। इस दिन विधिपूर्वक श्री गणेश जी का पूजन-अर्चनाकी जाती है। शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, इस दिन पर भगवान गणेश की उपासना करने और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने से साधक को विशेष लाभ मिलता है। यानी शाम को चतुर्थी तिथि में चंद्रोदय हो, तो उस दिन व्रत रखना चाहिए। इस व्रत में सूर्योदय के समय जो तिथि हो उसका विचार नहीं किया जाता। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी उम्र, संतान की दीर्घायु और सौभाग्य की कामना से व्रत करती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छा पति पाने के लिए दिन भर व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि जो साधक शुरू से ही श्री गणेश जी का व्रत करते आ रहे है उन्हें व्रत रखना चाहिए। उन्होंने भगवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय माना गया है। इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता का दर्जा प्राप्त है। भगवान गणेश अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को हर लेते हैं इसीलिए इन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है। गणेश चतुर्थी का व्रत सभी प्रकार के संकटों को दूर करने के लिए एंव सुख सौभाग्य एवं संपत्ति की प्राप्ति के लिए किया जाता है। गणेश जी को लड्डू अति प्रिय है। इसलिए इस दिन भगवान गणेश को तिल के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू या बेसन के लड्डुओं का भोग लगाए। सुबह जल्दी उठकर पानी में काले तिल डालकर स्नान करें। सोने, चांदी, तांबा या मिट्टी की गणेश जी की मूर्ति बनवाएं। भगवान गणेश की पूजा सुबह और शाम यानी दोनों वक्त की जानी चाहिए। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा करें। फिर गणेश जी को मोदक, लड्डुओं, नारियल, केले का भोग लगाना भी बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद ब्राह्मणों को लड्डू दान करें।


