संगरूर जिले के दो गांवों में बने डेरों में सिख समुदाय के लोगों ने मुस्लिमों की इफ्तिहारी के लिए लंगर लगाया। दोनों डेरों में लंगर तैयार करने के लिए आसपास के गांवों के लोग पहुंचे। आसपास के गांवों में रहने वाले मुस्लिम परिवारों को रोजा खोलने का डेरों से आमंत्रण दिया गया। मुस्लिम परिवार रोजा खेलने के वक्त डेरों में पहुंचे। डेरा संचालकों व अन्य लोगों ने मुस्लिम परिवारों को बैठाकर उन्हें खाना, फल व अन्य खाने का सामान परोसा। मुस्लिम परिवारों ने रोजा खोलने की प्रक्रिया को पूरा किया और उसके बाद सभी ने मिलकर इफ्तिहारी के तौर लंगर का आनंद लिया। डेरा संचालकों का कहना है कि ये मुस्लिम परिवार भी इन्हीं गांवों के हो चुके हैं और हर साल इस तरह की व्यवस्था की जाती है। डेरे मेंं आस्थारखने वाले सिख परिवार इफ्तहारी की पार्टी करके समाज को संदेश देना चाहते हैं कि सभी एक ही परमात्मा के बनाए हुए लोग हैं। इन गांवों में हिंदू, सिख व मुस्लिम सभी त्योहार मिलकर मनाते हैं। बाबा गोसाईं सिद्ध में 20 साल से होती है इफ्तिहारी संगरूर जिले के भवानीगढ़ के नजदीक राजपुरा गांव में बाबा गोसांई सिद्ध का डेरा है। डेरे के संचालन में सिख परिवार ही सेवा करते हैं। डेरे में 20 साल से मुस्लिम परिवारों के लिए इफ्तिहारी पार्टी का आयोजन किया जा रहा है। सात गांवों के मुस्लिम परिवार होते हैं शामिल डेरे के सेवादार मोरविंदर सिंह ने बताया कि इफ्तिहारी के लिए आसपास के सात गांवों में रहने वाले मुस्लिम परिवारों को बुलाया जाता है। सिख परिवार डेरे में आकर मुस्लिम परिवारों के रोजा खोलने की व्यवस्था करते हैं। सामाजिक सौहार्द का इससे अच्छा उदाहरण कहीं और नहीं हो सकता। वो नगर कीर्तन का सत्कार करते हैं गांव की पूर्व सरपंच मनजीत कौर का कहना है कि गुरु पर्व पर जब नगर कीर्तन निकलता है तो आसपास के गांवों के मुस्लिम परिवार पूरे विनम्र भाव से स्वागत व सत्कार करते हैं। यही नहीं हर त्यौहार गांव के लोग आपस में मिलकर मनाते हैं। 20 साल से डेरे में आ रहे हैं रोजा खोलने मुस्लिम इंतिजामा कमेटी के सदस्य मौलवी मोहम्मद नाजिर का कहना है कि उन्हें गांव में रहते हुए 25 साल से ज्यादा हो गए। उन्होंने कहा कि इस डेरे में 20 साल से मुस्लिम परिवारों के लिए इफ्तिहारी की व्यवस्था की जा रही है। इस गांव की खासबात यह है कि यहां का मुसलमान गुरुपर्व भी मनाता है तो हिंदुओं के त्यौहारों में भी शामिल होता है। वहीं अन्य धर्मों के लोग भी मुस्लिमों के धार्मिक त्यौहारों में उनके साथ होते हैं। इस डेरे में रोजा खोलने के लिए महिलाएं बच्चे व बुजुर्ग सभी आते हैं और सेवादार पूरी श्रद्धा के साथ उनका रोजा खुलवाते हैं। यहां आकर कतई नहीं लगता है कि रोजा खोलने के लिए वो घर से बाहर हैं। हरिगढ़ डेरा टिब्बीसर में भी मुस्लिमों के लिए इफ्तिहार पार्टी संगरूर के ही दूसरे गांव हरिगढ़ में डेरा टिब्बीसर है। इस डेरे में भी हर साल मुस्लिमों के रोजे खुलवाने के लिए इफ्तिहार पार्टी की जाती है। इस साल भी शुक्रवार को जुम्मे वाले दिन डेरे की तरफ से इफ्तिहारी की व्यवस्था की गई। सिख परिवारों ने मुस्लिमों के लिए खाना पकाया और फलों की व्यवस्था की। मुस्लिमों ने नमाज अदा की तो सिखों ने की अरदास इफ्तिहारी से पहले मुस्लिम परिवारों ने नमाज अदा की और खुदा का शुकराना किया। वहीं सिख परिवारों ने अरदास की और सरबत के भले की कामना की। दोनों धर्माें के लोगों ने आपसी सौहार्द दिखाते हुए एक दूसरे को बधाई दी। डेरे में श्री गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश भी है। श्री गुरुग्रंथ के सामने नतमस्त होने के बाद डेरे से जुड़े लोगों ने अरसदास की। सिख-मुस्लिम महिलाओं ने मिलकर पकाया लंगर डेरे में सिख व मुस्लिम समुदाय की महिलाओं ने मिलकर लंगर का खाना पकाया। उसके बाद मुस्लिम परिवारों ने रोजा खोलने की प्रक्रिया पूरी की और फिर सभी ने मिलकर इफ्तिहारी के रूप में लंगर का आनंद लिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो दोनों डेरों की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और इस तरह के प्रयासों को सामाजिक सौहार्द का उदाहरण बताया जा रहा है। खास बात यह है कि इन दोनों डेरों में रोजा खोलने वाली मुस्लिम महिलाएं भी हैं।


