संगीत सम्राट तानसेन के शताब्दी समारोह के दौरान सजाए गए वर्षों पुराने दुर्लभ वाद्ययंत्रों को ग्वालियर के अलावा उज्जैन में सजाया जाएगा। इन वाद्ययंत्रों की संख्या 1000 होगी। दोनों शहरों में 500-500 वाद्ययंत्र भोपाल से भेजे जाएंगे। वर्तमान में संस्कृति विभाग के पास 650 दुर्लभ वाद्ययंत्र हैं। इनका प्रदर्शन गत 15 से 19 दिसंबर तक हजीरा स्थित तानसेन परिसर में लगाई गई नाद प्रदर्शनी में पहली बार किया गया था। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ग्वालियर में वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन पड़ाव स्थित तानसेन कलावीथिका और उज्जैन में त्रिवेणी संग्रहालय में किया जाएगा। कलाप्रेमियों को यह साैगात नए साल में मिलेगी। इंटरनेट के जमाने में नई पीढ़ी के युवा इन वाद्ययंत्रों पर वादन भी कर सकेंगे। इसके लिए वरिष्ठ कलाकारों की नियुक्ति भी होगी। ये कलाकार प्रादेशिक स्तर के रहेंगे, जो दोनों शहराें में संगीत की शिक्षा देने आते-जाते रहेंगे। रोटेशन के हिसाब से बदलते रहेंगे वाद्ययंत्र : मप्र संस्कृति विभाग ने यह दुर्लभ वाद्ययंत्र प्रदेश के वरिष्ठ वादकों और उनके परिवारों से जुटाए हैं। इनमें से कई वाद्ययंत्र सालों पुराने हैं और उनकी मरम्मत कराई जा रही है। खास बात यह है कि इन वाद्ययंत्रों की समय-समय पर दोनों शहरों में अदला-बदली की जाएगी, ताकि दर्शक नए अनुभव ले सकें। फिलहाल ग्वालियर से इन्हें भोपाल पहुंचा दिया गया है। तानसेन समारोह 2024 के अंतर्गत लगी नाद प्रदर्शनी में सजाए गए वाद्ययंत्रों को ग्वालियर और उज्जैन में सजाया जाएगा। यह संगीत सम्राट तानसेन को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। -एनपी नामदेव, संचालक, संस्कृति संचालनालय, भोपाल


