भास्कर संवाददाता | निमरानी अखिल विश्व गायत्री परिवार के मार्गदर्शन में ग्राम मुंकुदपुरा में आयोजित तीन दिनी पंच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का मंगलवार को समापन हुआ। ग्राम के सभी जोड़ों ने यज्ञ में शामिल होकर आहुतियां दी। योगेश पटेल, गायत्री दसौंधी व महेश जोला ने कर्मकांड किया। महिला मंडल का गठन भी किया गया। ग्राम के 25 लोगों ने गुरुदीक्षा लेकर गायत्री मंत्र का नियमित जप करने का संकल्प लिया। संस्कारों की परिपाटी में 15 विद्यारंभ संस्कार व चार महिलाओं का गर्भ पूजन संस्कार हुआ। उन्हें स्वाध्याय करने के साथ श्रीफल दिया गया। आरती के साथ महाप्रसादी का वितरण किया गया। इससे पहले सोमवार की रात संगीत के माध्यम से गुरु वंदना रघुवीर पटेल, योगेश पटेल व शिवकुमार राठौड़ ने की। गायत्री परिजन रामलाल तिरोले ने बताया व्यक्ति बदलेगा तो विचारों से बदलेगा। व्यक्ति ने अपने विचारों में परिवर्तन कर लिया तो उसका जीवन बदल जाएगा। व्यक्ति के अंदर बैठे रावण को जलाने की आवश्यकता है। वासना को हटाने के लिए सद्बुद्धि की आवश्यकता होती है। गायत्री मंत्र सिद्धकारी मंत्र है। बच्चों को मोबाइल नहीं दिया तो एक दिन रोएगा, लेकिन अगर आने वाली संतान को संस्कार नहीं दिए तो उसे जिंदगी भर रोना पड़ेगा।मानव जीवन की गरिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा जीवन में गायत्री माता का मंत्र बहुत जरूरी है। आज हम अपनी संस्कृति भूलते जा रहे हैं। आज की पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर जा रही है। माता-पिता की सेवा करें, वही हमारे भगवान है। इससे बड़ा कोई पुण्य का काम नहीं है। अपना सुधार करना ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है। मानव जीवन मिला है तो इसका सदुपयोग करें। रात को दीपयज्ञ का आयोजन हुआ।


