रतनगढ़ के सरदारशहर रोड स्थित संकटमोचन बालाजी धाम में चल रहे श्रीरामचरितमानस व्याख्यान के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां भी कथा सुनने पहुंचे। महावीर सेवा संस्थान एवं श्री श्याम गोशाला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रणवाश्रम गनेड़ी के संत योगी निवृत्तिनाथ कृष्णा महाराज ने मानस की व्याख्या की। उन्होंने लंकिनी प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि लंकिनी भगवान की मौन भक्त थी, जिसे हनुमान ने लंका के द्वार पर ब्रह्म बोध करवाया। संत निवृत्तिनाथ ने बताया कि जहां सुमति होती है, वहां सभी तरह के सुख आते हैं और जहां कुमति होती है, वहां सभी तरह के दुख आते हैं। उन्होंने शबरी की कथा का भी वाचन किया, जिसमें बताया गया कि शबरी ने जीवनभर राम की प्रतीक्षा की और अंततः प्रभु के दर्शन प्राप्त किए। भगवान ने प्रेम के वशीभूत होकर शबरी का कल्याण किया। शबरी प्रसंग के दौरान संत निवृत्तिनाथ कृष्णा ने ‘कैसे छुएं प्रभू के चरनिया’ भजन प्रस्तुत किया, जिस पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे। कथा से पहले आयोजन समिति अध्यक्ष विनोद डागा ने व्यासपीठ की पूजा अर्चना की। बुधवार को हुई इस कथा में पूर्व मंत्री राजकुमार रिणवां सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


