संत परंपरा अनुसार की जाती है धर्म ध्वजा की स्थापना

भास्कर न्यूज | राजिम राजिम कल्प कुंभ मेला के तीसरे दिन लोमष ऋषि आश्रम में धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा के अनुरूप धर्म ध्वज विधिवत रूप से फहराया गया। आश्रम परिसर में उपस्थित साधु-संतों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच यह पावन आयोजन संपन्न हुआ। ध्वज दंड में पूर्व से लिपटे भगवा वस्त्र को उतारकर नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके पश्चात लंबे और ऊंचे बांस के ध्वज दंड को भूमि में विधिवत गाड़कर धर्म ध्वज फहराया गया। इस दौरान पूरा आश्रम परिसर हर-हर महादेव और जय सनातन धर्म के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर संत गोकुल गिरी महाराज ने बताया कि वर्ष से प्रतिवर्ष लोमष ऋषि आश्रम में धर्म ध्वज फहराने की परंपरा निभाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज सनातन धर्म की रक्षा, एकता और परंपरा का प्रतीक है। ध्वजारोहण से पूर्व विधिवत ध्वज पूजन भी किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ संत मंडल के अध्यक्ष महंत उमेशानंद गिरी महाराज सहित गोपाल गिरी महाराज, सनत महाराज, राघवेंद्र गिरी महाराज, महंत भीम गिरी महाराज, सत्यानंद महाराज, परमेश्वर गिरी महाराज, तारक भारती महाराज, लालपुरी महाराज, दत्तपुरी महाराज सहित अनेक साधु-संतों की उपस्थित रही। 6 को निकाली जाएगी पेशवाई: गोकुल गिरी महाराज ने बताया कि वर्तमान में जूना और आवाहन अखाड़ा के साधु-संत राजिम पहुंच चुके हैं। आगामी 6 फरवरी को साधु-संतों द्वारा भव्य पेशवाई निकाली जाएगी, जो महाप्रभु दत्तात्रेय मंदिर से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण करते हुए लोमष ऋषि आश्रम पहुंचेगी। बता दें कि संत परम्परा में ऐसी मान्यता है कि जिस तीर्थ स्थान में कुंभ, अर्ध कुंभ या कल्प कुंभ होता है वहां नागा साधुओं की उपस्थिति से कुंभ की सार्थकता होती है। नागा साधु अपने अपने अखाड़ों और संत परम्परा के अनुसार ध्वजारोहण कर धर्म ध्वजा की स्थापना करते हैं। उसी के बाद नागा सम्प्रदाय के साधु कुंभ मे आकर पर्व स्नान, शाही यात्रा जैसे आयोजनों का हिस्सा बनकर कुंभ के महत्व को पूर्ण करते हैं।

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