संत लिखमीदास 9वां पाटोत्सव अमरपुरा धाम में कल से:​माली समाज द्वारा आयोजित 6 दिवसीय समारोह में जुटेंगे देशभर के श्रद्धालु; 650 प्रतिभाओं का होगा सम्मान

जिले के अमरपुरा स्थित संत शिरोमणि लिखमीदास महाराज के समाधिस्थल पर नौवें पाटोत्सव का भव्य आगाज़ कल राज्यस्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह के साथ होने जा रहा है। अमरपुरा में संत शिरोमणि श्री लिखमीदास स्मारक विकास संसथान द्वारा निर्मित इस भव्य मंदिर परिसर में यह कार्यक्रम छह दिनों तक चलेगा, जिसमें देशभर से माली समाज के लोग एकत्रित होंगे। कार्यक्रम की तैयारियों को आज अंतिम रूप दिया जा रहा है। ​प्रतिभा सम्मान समारोह से उत्सव का शुभारंभ ​पाटोत्सव के दौरान कल माली समाज का राज्य स्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित होगा। इस प्रतिष्ठित सम्मान समारोह के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिनमें से लगभग 800 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से, शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट प्रदर्शन करने वाले और केंद्र तथा राज्य सरकार की सेवाओं में चयनित 650 मेधावी प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। ​भक्तमाल कथा और विशाल भजन संध्या ​1 दिसंबर से 4 दिसंबर तक धार्मिक आयोजनों की श्रंखला में भक्तमाल कथा का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रसिद्ध संत रामप्रसाद महाराज अपनी वाणी से कथावाचन करेंगे। इसके बाद 4 दिसंबर को ही एक विशाल भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के प्रसिद्ध भजन गायक अपनी संगीतमय प्रस्तुतियां देंगे। छह दिवसीय इस आयोजन का समापन 5 दिसंबर को मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के साथ किया जाएगा। ​प्रमुख नेताओं की शिरकत, भंडारे की व्यवस्था ​इस पाटोत्सव में हरियाणा के मुख्यमंत्री साहेब सिंह सैनी भी शिरकत करेंगे, हालांकि उनके आगमन का दिन अभी निश्चित नहीं हुआ है। राज्यसभा सांसद राजेंद्र गेहलोत पूरे उत्सव के दौरान मौजूद रहेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के कई अन्य बड़े नेता भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। ​आयोजन के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिसके लिए प्रबंध समिति द्वारा 6 दिन तक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल पर 10,000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला डोम और टेंट लगाया जा रहा है। ​संत लिखमीदास: गृहस्थ साधु और रामदेव जी के अनन्य भक्त ​संत लिखमीदास का जन्म नागौर के अमरपुरा चेनार में हुआ था। वे एक गृहस्थ साधु थे और भगवान रामदेव जी के परम भक्त थे। उन्होंने गृहस्थ धर्म का पालन करते हुए कठोर तपस्या की तथा अपने जीवनकाल में कई दोहे और भजन लिखे जो आज भी लोकप्रिय हैं। 8 सितंबर, 1830 को लगभग 80 वर्ष की आयु में उन्होंने नागौर के अमरपुरा धाम में जीवित समाधि ली थी। इस स्थान पर आज भव्य मंदिर स्थित हैं, जिनमें एक मंदिर में उनकी प्रतिमा और दूसरे मंदिर में उनके आराध्य रामदेव जी महाराज, भगवान कृष्ण तथा भगवान राम-सीता के विग्रह स्थापित हैं।

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