संविधान भारतीय चेतना का आध्यात्मिक विस्तार

भास्कर न्यूज | जालंधर गुलमोहर सिटी स्थित मां बगलामुखी धाम में रविवार को मासिक सामूहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर धाम के संस्थापक नवजीत भारद्वाज ने आध्यात्मिक और संवैधानिक मूल्यों के संगम पर बल देते हुए भक्तों को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ ब्राह्मणों द्वारा मुख्य यजमानों से विधिवत पूजन के साथ किया गया। नवजीत भारद्वाज ने कहा कि 26 जनवरी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का उत्सव है। उन्होंने संविधान को भारतीय चेतना का आध्यात्मिक विस्तार बताते हुए कहा कि संस्कारों से भारत में शासन केवल सत्ता से नहीं, बल्कि संस्कारों से चलता है। जिस तरह अध्यात्म मर्यादा सिखाता है, संविधान भी नागरिक को अनुशासित रहने की प्रेरणा देता है। नवजीत भारद्वाज ने कहा कि गणतंत्र केवल झंडा फहराने से नहीं, बल्कि ईमानदार नागरिकों और सत्यनिष्ठ अधिकारियों से जीवित रहता है। उन्होंने आह्वान किया कि आज केवल संविधान को पढ़ने की नहीं, बल्कि उसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है। अध्यात्म भीतर का दीप जलाता है और संविधान बाहरी व्यवस्था बनाता है; दोनों के मेल से ही राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त कर सकता है। यहां श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, राकेश प्रभाकर, सरोज बाला, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, प्रदीप मौजूद रहे।

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