संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की आधारशिला, जनहित में हो कार्य : डॉ. एसपी सिंह

भास्कर न्यूज | बारां राज्य सरकार के दो साल पूरे होने पर आयोजित सुशासन सप्ताह में मंगलवार को मिनी सचिवालय सभागार में जिले में सुशासन से जुड़े नवाचारों को लेकर कार्यशाला हुई। इसमें सेवानिवृत्त आईएएस बारां के पूर्व कलेक्टर डॉ. एसपी सिंह मुख्य अतिथि थे। डॉ. सिंह ने कहा कि आदिकाल से मानव श्रेष्ठतम और आदर्श व्यवस्था की खोज करता आया है, और प्रशासन का सर्वश्रेष्ठ मॉडल स्वयं प्रकृति की व्यवस्था है। प्रकृति का सृजन, संरक्षण, दिन-रात का चक्र, ऋतु परिवर्तन, पूर्वानुमान, योजना, कार्य प्रबंधन एवं नियंत्रण सभी सुशासन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के लिए प्रकृति से बेहतर प्रशासनिक मॉडल और कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य या देश के विकास की परिकल्पना तभी संभव है, जब उसकी कानून व्यवस्था सुदृढ़ हो। प्रशासन एक नियामक तंत्र है, जिसका उद्देश्य व्यवस्था को बनाए रखना है। सुशासन की पहली सीढ़ी संवेदनशीलता है। उपलब्ध संसाधनों का सही आंकलन कर उन्हें जनहित में उपयोग में लाना ही सुशासन का वास्तविक परिचायक है। डॉ. सिंह ने जनभागीदारी को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए कहा कि प्रशासन एवं योजनाओं में जितनी अधिक सहभागिता होगी, लोकतंत्र उतना ही मजबूत होगा। ग्राम सभाओं का आयोजन, उनका सुदृढ़ीकरण, अधिकारियों के ग्राम भ्रमण एवं रात्रि चौपाल जैसे प्रयास प्रशासन को जमीनी हकीकत से जोड़ते हैं और सुशासन की वास्तविक स्थिति से रूबरू कराते हैं। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता ही सुशासन है, और पारदर्शिता के अभाव में ही भ्रष्टाचार पनपता है। आधुनिक तकनीक के युग में ई-गवर्नेंस, सूचना का अधिकार, इंटरनेट और मोबाइल तकनीक के माध्यम से शासन में पारदर्शिता लाना आसान हुआ है। इससे प्रत्यक्ष लाभ अंतरण संभव हुआ और आमजन को सरकारी सेवाएं सरल एवं सुगमता से मिलने लगी हैं। जवाबदेही को सुशासन का प्रमुख आधार बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजनाएं सही तरीके से लागू हो रही हैं या नहीं तथा लक्षित वर्ग को वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं। सुशासन का अंतिम उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जटिलताओं एवं अनावश्यक लालफीताशाही पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यही भ्रष्टाचार और अनावश्यक विलंब को जन्म देती हैं। जब निजी क्षेत्र पारदर्शिता और जवाबदेही से कार्य कर सकता है, तो सरकारी क्षेत्र में भी ऐसा संभव है। उन्होंने कहा कि आमजन को न्याय दिलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि त्वरित न्याय दिलाना भी उतना ही आवश्यक है, क्योंकि न्याय में विलंब अन्याय के समान है। डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में सुशासन का अर्थ “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जनकल्याण को सर्वोपरि माना है। वहीं महात्मा गांधी का ‘स्वराज’ और ‘सर्वोदय’ भी सुशासन की अवधारणा को सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है। महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख किया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा किए जा रहे सुशासन प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला में कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए जिले में किए जा रहे सुशासन संबंधी नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के मंशानुरूप जिले में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। सुशासन सप्ताह के तहत प्रशासन गांव की ओर अभियान एवं ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उ न्होंने कहा कि गुड गवर्नेंस का अर्थ गुणवत्ता, सत्यता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है। विजन डॉक्यूमेंट 2047 प्रस्तुत किया मिनी सचिवालय में आयोजित कार्यशाला में सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय के सहायक निदेशक योगेंद्र शर्मा ने सुशासन के तहत बारां जिले का 2047 विजन डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया। सीएमएचओ डॉ. संजीव सक्सेना ने स्वास्थ्य सेवाओं में किए गए नवाचारों पर प्रकाश डाला तथा वाटरशेड एसई मनोज पूर्वगोला ने जिले में जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्यों की जानकारी दी। कार्यशाला में विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारी आदि उपस्थित रहे। कार्यशाला में बारां जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने, शाहाबाद में पैंथर सफारी की संभावना, सोरसन हट्स को शुरू करने, शहर में कोटा रोड से अस्पताल रोड तक सड़क निर्माण, शहर में ट्रेफिक लाइटों की संभावना तलाशना, पार्किंग की समस्या का समाधान, मंडी विस्तार की कार्ययोजना पर भी प्रमुखता से चर्चा की। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल रहे।

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