चित्तौड़गढ़ शहर के संस्कार द स्कूल में बुधवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया गया। इस मौके पर स्कूल का माहौल पूरी तरह से उत्सवमय दिखाई दिया। कक्षा 1 से लेकर कक्षा 11 तक के सभी स्टूडेंट्स ने पूरे जोश और उमंग के साथ इस प्रोग्राम में भाग लिया। सुबह से ही बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला। स्कूल को भारतीय संस्कृति के अनुरूप सजाया गया था, जिससे यह पर्व और भी खास बन गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को हमारी भारतीय परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना था, ताकि वे अपने त्योहारों के महत्व को समझ सकें और उन्हें अपने जीवन में अपनाएं। सूर्य उपासना और योग का महत्व बताया गया स्कूल के डायरेक्टर तिलक काबरा ने मकर संक्रांति के पावन मौके पर बच्चों को सूर्य भगवान के महत्व के बारे में जानकारी दी। इस दौरान स्टूडेंट्स ने सामूहिक रूप से सूर्य भगवान को जल अर्पित किया और पूरे अनुशासन के साथ सूर्य नमस्कार किया। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने बच्चों को योग और सूर्य उपासना को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी और कहा कि इससे शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं। पतंग, खेल और परंपराओं से जुड़ा आनंद प्रोग्राम के दौरान बच्चों ने पारंपरिक तरीके से पतंग उड़ाकर मकर संक्रांति का आनंद लिया। स्कूल परिसर में रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में लहराती नजर आईं, जिससे बच्चों में खास खुशी दिखाई दी। इसके साथ ही बच्चों ने सितोलिया जैसे पारंपरिक खेलों सहित अन्य मनोरंजक खेल भी खेले। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों ने न केवल मनोरंजन किया बल्कि हमारी पुरानी खेल परंपराओं को भी जाना। निदेशक द्वारा बच्चों को मकर संक्रांति के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में भी सरल भाषा में समझाया गया, जिससे बच्चों ने पर्व की वास्तविक भावना को समझा। संस्कृति और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश दिया स्कूल की प्रिंसिपल शीतल काबरा ने इस मौके पर सभी स्टूडेंट्स, शिक्षकों और अभिभावकों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक पर्व बच्चों में अच्छे संस्कार, परंपराओं के प्रति सम्मान और भारतीय संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित करते हैं।


