कोंडागांव के मुंडा क्षेत्र बुलागांव के गंगा मुंडा में शनिवार को खंड स्तरीय गांयता जोहारनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 14 पंचायतों के 38 गांवों से हजारों ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ तिरुमाल ललित नरेटी और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डॉ. जयमती कश्यप मुख्य वक्ता थे। मुंडा क्षेत्र अध्यक्ष फिरती कोर्राम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। गांयता जोहारनी एक परंपरागत त्योहार है। इसमें गांव बसाने वाले पूर्वजों को गांयता कहा जाता है। उनकी याद में मनाए जाने वाले इस त्योहार में गांयताओं को पगड़ी पहनाकर और नए चावल से बने चिवड़ा का टीका लगाकर सम्मानित किया जाता है। ग्रामीणों ने पेन-पुरखा, आंगादेव, बुढ़ादेव और जिम्मेदारीन याया के साथ सामूहिक पूजा-अर्चना की। नवा खाई पर्व के बाद गांयताओं का सम्मान पगड़ी और हल्दी-चावल से किया गया। आदिवासी नायकों किया गया याद सभी को कुड़ई पत्ता में नए चावल से बने चिवड़ा का टीका लगाया गया और सामूहिक भोजन कराया गया। ललित नरेटी ने आदिवासी नायकों बिरसा मुंडा, टंट्या मामा और वीर गुंडाधुर को याद किया। डॉ. जयमती कश्यप ने आदिवासी महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। जिला अध्यक्ष बंगाराम सोढ़ी ने संस्कृति और अधिकारों के संरक्षण की बात कही। कार्यक्रम में मांदर, रेला और हुलकी पाटा की धुन पर सामूहिक नृत्य का आयोजन हुआ। इसमें हजारों ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर बस्तर की संस्कृति की झलक पेश की।


