संस्कृत विश्वविद्यालय में ऊनी वस्त्रों का वितरण किया गया:200 जरूरतमंद लोगों को शॉल, स्वेटर, कंबल और ऊनी वस्त्र वितरित किए गए

मानवता की सेवा उच्चतम आदर्श है, जो समाज के प्रति दायित्व का बोध कराती है। यह न केवल नैतिक जिम्मेदारी है, बल्कि समाज में सद्भाव, एकता और भाईचारे को प्रोत्साहित करने का सशक्त माध्यम भी है। यह बात मंगलवार को जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.रामसेवक दुबे ने ऊनी वस्त्रों के वितरण समारोह में कही। मित्राय फाउंडेशन की ओर से विश्वविद्यालय में हुए समारोह के मुख्य अतिथि कैप्टन शशि किरण ने कहा कि व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी घबराना नहीं चाहिए और मानवता के कल्याण के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। मानवता की सेवा का उद्देश्य शारीरिक रूप से मदद करना नहीं है, बल्कि यह मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक समर्थन भी प्रदान करना है। मित्राय फाउंडेशन के विनीत शर्मा और रश्मि शर्मा ने कहा कि हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह दूसरों की मदद करने के लिए आगे बढ़े, चाहे यह समय, संसाधन या श्रम के रूप में हो। यह न केवल आंतरिक शांति और संतोष देता है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान भी करता है। समारोह संयोजक शास्त्री कौशलेन्द्र दास ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स के साथ ही लगभग 200 जरूरतमंद लोगों को शॉल, स्वेटर, कंबल और ऊनी वस्त्र वितरित किए गए।

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