रांची | डॉ. अभय मिंज ने इंटरनेशनल यूथ फोरम (आईवाईएफ) के पांचवें संस्करण में एक विशिष्ट वक्ता के रूप में अपनी बात रखी। इस कार्यक्रम में 62 देशों के युवा, 19 देशों के राजदूत और करीब 553 प्रतिभागी शामिल थे। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने आदिवासी समाज के पुरखे और महान नेता दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देकर की। दिशोम गुरु को आजादी के बाद का सबसे बड़ा आदिवासी नायक बताते हुए कहा कि उनके जाने से देश ने एक महान सामाजिक-राजनीतिक नेतृत्व खो दिया है। डॉ. मिंज ने अपने संबोधन में आदिवासी समाज, जलवायु परिवर्तन और शैक्षिक संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया। कहा कि आज कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और संगठन जलवायु परिवर्तन पर आदिवासी जीवनशैली के प्रभाव पर शोध कर रहे हैं। झारखंड के आदिवासियों की जीवनशैली और वनों के साथ उनके गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि अगर हमें सतत विकास और पर्यावरण के संबंध को समझना है, तो आदिवासी जीवनशैली को अपनाना होगा।


