संस्थानों को लैंगिक भेदभाव और भयमुक्त वातावरण बनाने की जरूरत : चीफ जस्टिस

विशेष संवाददाता| रांची झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को लैंगिक चुनौतियों और उनसे निपटने की रणनीति विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन करने के बाद चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है। संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे भेदभाव और भय से मुक्त वातावरण बनाएं। उन्होंने न्यायपालिका में लैंगिक न्याय और गरिमा को मजबूत करने की बात कही। इससे पूर्व जेंडर सेंसेटाइजेशन एंड इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की अध्यक्ष जस्टिस अनुभा रावत चौधरी ने कहा कि समिति कार्यस्थलों पर संवेदनशीलता, सम्मान और निष्पक्षता बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजश्री वर्मा ने इस विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यंत उपयोगी और व्यावहारिक बताया। इस मौैके पर समिति द्वारा आयोजित रिसर्च पेपर प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इसमें प्रिया साव को प्रथम, पूर्वा गुड़िया को द्वितीय और अमित कुमार मिश्रा को तृतीय पुरस्कार दिया गया। मौके पर सभी ने अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जस्टिस आनंद सेन, जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी, जस्टिस संजय प्रसाद, जस्टिस एके राय सहित कोर्ट के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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