सख्ती के लिए बढ़ाई फीस:एक तहसील की जमीन की रजिस्ट्री दूसरी तहसील में कराने पर पहले देने होते थे 1100, अब देने होंगे 22 हजार रुपए

एक तहसील की जमीन की रजिस्ट्री अब दूसरी तहसील के एरिया में जाकर कराना 20 गुना महंगा पड़ेगा। अभी तक तहसील बदलकर रजिस्ट्री कराने पर केवल 1100 रुपए शुल्क लगता था। लेकिन अब नियमों में संशोधन कर इसकी फीस 21900 रुपए कर दी गई है। अफसरों का कहना है​ कि आमतौर पर जमीन दलाल रजिस्ट्री के लिए कोई दस्तावेज कम होने या त्रुटी होने पर क्षेत्र बदलकर रजिस्ट्री करवा लेते थे। इससे कई बार फर्जी रजिस्ट्री होने की आशंका बढ़ जाती थी। इस वजह से इसकी फीस अब 20 गुना बढ़ा दी गई है। अब जरूरतमंद लोग ही इस सेवा का फायदा उठा सकेंगे। नए नियम के अनुसार ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट लेते समय तहसील बदलने की सूचना देने पर पहले तय फीस 21900 रुपए देना होगा। इसके बाद ही रजिस्ट्री के लिए तारीख और समय मिल सकेगा। हालांकि इस फैसले का सबसे ज्यादा विरोध अधिवक्ता कर रहे हैं। रजिस्ट्री कराने वाले वकीलों का कहना है कि जरूरत के अनुसार लोग एक तहसील से दूसरे तहसील में जाकर रजिस्ट्री करवा लेते थे। लेकिन अब इतना ज्यादा शुल्क लिया जा रहा है कि कोई भी क्षेत्र बदलकर पंजीयन नहीं करवाना चाह रहा है। इसलिए इस फीस को कम करना चाहिए। जमीन पर महंगे पेड़ों की कीमत नहीं जुड़ेगी सरकार ने रजिस्ट्री के लिए एक और बड़ा बदलाव किया है। अभी तक जिस जमीन की रजिस्ट्री हो रही है और उस पर मूल्यवान पेड़ जैसे सागौन, सरई, चंदन या दूसरे महंगे पेड़ हो तो उसका मूल्यांकन कर उसकी कीमत जमीन के साथ जोड़ी जाती थी। इससे जमीन की कीमत और बढ़ जाती। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था के तहत जमीन पर जितने भी महंगे पेड़ होंगे उसकी कीमत रजिस्ट्री में नहीं जोड़ी जाएगी। मूल जमीन की कीमत के आधार पर ही रजिस्ट्री होगी। इस नए बदलाव से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे पेड़ों की संख्या छिपाने के लिए होने वाला फर्जीवाड़ा भी खत्म हो जाएगा। लोग अपनी स्वेच्छा से बताएंगे कि उनकी जमीन पर कितने पेड़ हैं। इतना ही नहीं इससे पेड़ों की अवैध कटाई भी कम होगी। जमीन में किसी भी तरह के फर्जीवाड़ा को रोकने और लोगों की सुविधा बढ़ाने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है। जमीन दलाल या एजेंट जैसे लोग तहसील बदलकर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री नहीं करा पाएंगे। पेड़ों की कीमत नहीं जोड़ने पर अवैध कटाई रुकेगी। लोग खुलकर बता सकेंगे कि उनकी जमीन पर कितने पेड़ हैं।
ओपी चौधरी, वित्त मंत्री छत्तीसगढ़ सरकार

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